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समाजोत्थान को समर्पित एक व्यक्तित्व…. देवकीनंदन सोन

(प्रमुख समाज सेवी एवम् ख्याति प्राप्त शू डिजाईनर)

आगरा में ताजमहल पाल ताजगंज के सिद्धार्थ नगर निवासी क्षेण सरपंच वाद् रामस्वरूप सोन एवं श्रीमती द्रोपती देवी के सुपुत्र श्री देवकी नन्दत सोन आज नगर के प्रमुख समाजसेवियों की अग्रिम पंक्ति में शुमार किया है।  जिन्होंने मात्र 22 वर्ष की आयु से ही समाज सेवा के कार्यों ने परम पूज्य चाचा साहव डॉ० भीमराव अम्बेडकर, बाबू जगजीवन राम तथा डॉ० मानिक चन्द जाटव वीर  के मिशन के लिए अनेक रचनात्मक कार्य किये, साथ ही जूता निर्यात एवं होटल व्यवसाय में भी अपने आपको स्थापित किया है।

श्री सोन ने दलितों की समस्याओं के सम्वन्ध में बाबू जगजीवन राम, प्रकाश राम अंबेडकर, संघप्रित गौतम, मीरा कुमार सत्य नरायन जटिया, सोहन पाल चुमनाक्षर डॉ० चन्द्रपाल तथा डॉ० सूरजभान पी०ए०० पुनिया जैसे अनेक प्रमुख दलित नेताओं से सम्पर्क कर मार्ग दर्शन प्राप्त किया। सराज सेय, जैसे पचित्र कार्य में धर्मपत्नी श्रीमती विद्यावती सोन ने हमेशा उन्हें प्रोत्साहितया है।

श्री सीन ने दलितों पर होने वाले जुल्मों के जिलाफ जहाँ आवाज बुलन्द की वहीं उनकी हर सम्भव सहायता कर मदद भी करते रहे। चाहे आगरा में 1978 कसे चावा साहब अम्बंधकर जयन्ती के याद हुए प्रदर्शन में पुलिस की गोली से शही हुए डेढ़ वर्जन अनुयाई या वेहली और साहूपुर में दलितों पर हुए नरसंहार के खिलाफ आन्दोलन ही क्यो न हो। सभी में समाज के साथ कन्धे से कन्धा मिलाकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उन्होंने 1993 में दलित (जाटव) परिपार की वरात न चढ़ने पर हुए पनवारी काड में एक दर्जन दलित व्यक्तियों के मारे जाने वाली घटना हुई या राजस्थान के कुम्हेर कांड में पारे गये व्यक्तियों के परितारों की धैर्य के साथ आटा, दाल, घायल बांटकर माद करने का पवित्र संकल्प उन्होंने वखूची निभाया। उन्होंने जहां गरीच बच्चों को निःशुल्क पुस्तकें उपलब्ध कर ने का कार्य या नई पीढ़ी को गार्ग प्रदर्शित करने हेतु चावू जगजीवनराम तथा वादा साहब पॉ० अम्बेडकर की अनेक प्रतिमायें स्थापित कराने के कार्य हो, उन्होंने वरथ्वी निभाये हैं।

श्री सोन अब तक आटन समाज उत्थान समिति (पंजीकृत) आगरा के जिला संयोजक के पद पर रहते हुए आगरा में लगभग एक हजार से भी अधिक मृत्युभोज जैसी कुप्रथा को बंद कराने में सफल हुए हैं। आगरा में आबेडकर जयन्ती पर आयोजित भीम नगरी में सैकड़ों दहेज रहित विवाह सम्पन्न कराने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। देवकी नन्दन सोन ने सामाजिक कार्यों को उमर्पित नागरिकों, बुद्धिजीवियों को “समाज रत्न” की उपाधि से रुप्मानित करने का बीड़ उठाया है, जिससे उन्हें बेहद सराहा जाता है। उन्होने अम्बेडकर मिशन के प्रचार के लिए भीम ज्योति तथा भीम यात्रा निकाल कर दलितों में जागृति लाने का रचनात्मक कार्य किया। उन्होंने अपने पैत्रक निवास सिद्धार्थ नगर में जन का वाण हेतु एक बुद्ध विहार का निर्माण कराके समाज को भेंट किया। उनके रवनात्मक कार्यों के लिए जहाँ अलीगढ़ शहर में उन्हें, भीम रत्न की उपाधि से सम्मानित किया।

किया गया, वहीं धर्मकला के क्षेत्र में भी प्रशासन के उद्योग विभाग द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। 5 जुलाई 2005 को दिल्ली में उन्हें राष्ट्रीय समत अवार्ड देकर सम्मानित किया गया। उनके लेख अनेक पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं। साथ ही आकाशवाणी पर वार्ता जता दूरदर्शन के मैट्रों चेनल पर भी उनके व्यक्तित्व पर बनी केल्क द नेशन सेलीब्रेट का प्रसारण सन 1997 में हो चुका है। मास्टर क्राफ्ट मैन श्री सोन प्रधानमंत्री रोजगार योजना के अन्तर्गत, अनेक बेरोजगार युवकों को धर्म कला का प्रशिक्षण दे चुके हैं तथा इस सम्बन्ध में विदेश यात्रा भी कर चुके है। 14 अगस्त 2206 को दिल्ली के होटल ग्राण्ड में हरियाणा के गर्भनर डॉ० ए०आर० किदवई द्वारा श्रेष्ठ व्यवसाई आई०एम०एम० अवार्ड से सम्मानित किया गया। 05 मई 2010 को उ०प्र० सरकार द्वारा निर्यात में श्रेष्ठता के लिये सम्मानित किया गया है।

श्री सोन एक सच्चे धर्मपरायण, लगनशील, समाज सुधारक हैं। आप जाटव समाज उत्थान समिति के जिल्ला संयोजक, उत्तर प्रदेश धर्म विकास उत्पादन समिति के महामंत्री तथा अखिल भारतीय अम्बेडकर अनुयाई एकता परिषद, अखिल भारतीय बाबू जगजीवन राम समता आन्दोलन के सदस्य तथा भारतीय दलित वर्ग संघ के राष्ट्रीय मन्त्री और तथा नेशनल ज्योग्राफिक सोसाइटी (अमेरिका) के सदस्य है।

समाज सेवा रूपी रचनात्मक कार्यों के लिए श्री सीन ने जो भी उपलब्धियो प्राप्त की, उन सबका श्रेय वह अपने संगठन के सदस्यों तथा परिवारीजनों तथा शुभ चिन्तकों को देते हैं। वैसे सोन के परिवार पर समाज सेवा के संस्कार उनके वावा मिसरी जवाली राम तथा दादी आनन्दी देवी के द्वारा किये गये साम जिक कार्यों तथा कुप्रथाओं के खिलाफ स्प्टवादिता के कारण बचपन से ही पड़ गये थे और फिर सामाजिक कार्य उनकी प्राथमिकता धन गयी।

सोन का निगास आर्शीवाद ए-2, विभवनगर, आगरा आज भी सामाजिक गतिविधियों का केन्द्र बना हुआ है।

सोन के सम्बन्ध में राष्ट्रीय कवि राजाराम आजाद ने कहा कि-

बन्धु तुम्हारी कर्मतता ने अम्बर को चूमा है। क्षमताओं से हर्षित होकर हिमगिर भी झूमा है।।

कहें सोन का स्वर्ण वा कहे भारत का भू-चन्दन। ग्लिनसार कोगल स्वभाव के धनी देवकी नन्दन।।

हम अपने प्रिय समाज सुधारक हितैषी, चिंतक, ओजस्वी विचारक थी देवकी नन्दन सोन के उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं।

प्रेषक

बंगाली बाबू  सोनी

अध्यक्ष जाटव समाज उत्थान समिति (रजि०)

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