प्राचार्य बोले- गंभीर निमोनिया और पुरानी बीमारी से जूझ रहा था बच्चा, मौत से पहले वेंटिलेटर पर लिया गया था
आगरा, । एसएन मेडिकल कॉलेज में 10 वर्षीय उमेर की मौत को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच कॉलेज प्रशासन ने बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। अस्पताल प्रशासन ने साफ कहा है कि उमेर की मौत छत का प्लास्टर गिरने की घटना से नहीं हुई, बल्कि लंबे समय से चली आ रही बीमारी और गंभीर निमोनिया उसकी मौत की मुख्य वजह रहे।
पांच महीने की उम्र से पड़ते थे दौरे
प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता के मुताबिक, उमेर को करीब पांच महीने की उम्र से दौरे पड़ने की शिकायत थी। 11 माह की उम्र में एम्स, नई दिल्ली में जांच के बाद उसे वेस्ट सिंड्रोम की बीमारी होने की पुष्टि हुई थी। बच्चे को लंबे समय से विकास संबंधी समस्या भी थी और वह स्वयं उठने-बैठने में सक्षम नहीं था।
चार दिन के बुखार के बाद गंभीर हालत में पहुंचा था अस्पताल
उमेर को 19 अगस्त की रात 9:37 बजे चार दिन से बुखार और बढ़ती सांस की तकलीफ के बाद एसएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में भर्ती कराया गया था। अस्पताल पहुंचने के समय उसकी हालत बेहद गंभीर थी। जांच में खून की कमी भी सामने आई।
डॉक्टरों ने बच्चे को हाई फ्लो ऑक्सीजन पर रखा और ब्लड ट्रांसफ्यूजन किया। गंभीर निमोनिया के इलाज के लिए उच्च स्तरीय एंटीबायोटिक्स और दौरे नियंत्रित करने के लिए कई दवाएं दी गईं।
वेंटिलेटर पर लेने के कुछ घंटे बाद मौत
उपचार के बावजूद उमेर की हालत लगातार बिगड़ती गई। 21 अगस्त की शाम 7 बजे उसे वेंटिलेटर पर लिया गया। जीवनरक्षक दवाओं और चिकित्सकों के तमाम प्रयासों के बावजूद 22 अगस्त की सुबह करीब 6 बजे उसकी मौत हो गई।
पोस्टमार्टम कराने से परिजनों ने किया इनकार
कॉलेज प्रशासन के अनुसार, बच्चे की मौत के बाद परिजनों से पोस्टमार्टम कराने के लिए कई बार आग्रह किया गया, लेकिन उन्होंने लिखित रूप से पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया।
प्लास्टर की घटना और मौत का कोई संबंध नहीं: प्राचार्य
डॉ. प्रशांत गुप्ता ने कहा कि कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म पर उमेर की मौत को 21 अगस्त को हुई छत के प्लास्टर झड़ने की घटना से जोड़ा जा रहा है, जबकि इसका कोई संबंध नहीं है।
कॉलेज प्रशासन ने ऐसी खबरों को तथ्यहीन, असत्य और निराधार बताते हुए कहा है कि बच्चे की मौत गंभीर निमोनिया और उसकी लंबे समय से चली आ रही बीमारी के कारण हुई।
