नई दिल्ली, । देश में विभिन्न समुदायों के बीच संवाद, आपसी समझ और सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देने के उद्देश्य से इंस्टीट्यूट फॉर इस्लामिक एंड क्रॉस-कल्चरल स्टडीज (आई आई सी एस) का शुभारंभ नई दिल्ली स्थित इमाम हाउस में किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न धार्मिक और सामाजिक समुदायों से जुड़े लोगों ने भाग लिया।
शुभारंभ कार्यक्रम ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के चीफ इमाम डॉ. इमाम उमर अहमद इलियासी की मौजूदगी में आयोजित हुआ। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इस्लाम और सभी धर्म शांति, करुणा और सह-अस्तित्व का संदेश देता है। विभिन्न समुदायों के बीच संवाद मजबूत समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए आवश्यक है।
चीफ़ इमाम डॉक्टर इलियासी ने कहा, “इस्लाम एक शांतिप्रिय धर्म है, जो करुणा, सम्मान और सद्भाव की शिक्षा देता है। हमें एक-दूसरे को समझने और राष्ट्र की बेहतरी के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है। क्रॉस-कल्चरल संवाद समुदायों के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु बन सकता है और भारत की एकता को मजबूत कर सकता है।”
इस पहल से जुड़े प्रो. जसीम मोहम्मद ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता में निहित है। अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोग एक-दूसरे को समझें, मतभेदों का सम्मान करें और राष्ट्रीय हित में मिलकर काम करें, तो देश और अधिक प्रगति कर सकता है।
प्रो जसीम मोहम्मद ने कहा, “भारत सदैव विविध संस्कृतियों, भाषाओं, परंपराओं और विचारों की भूमि रहा है। यदि हमें भारत को महान बनाना है तो हमें एक-दूसरे को समझना, विविधताओं का सम्मान करना और व्यापक राष्ट्रीय हित में साथ मिलकर काम करना होगा।”
डॉ. दिनेश दुबे ने बताया कि संस्थान देशभर में सार्थक अंतर-सांस्कृतिक संवाद, शोध, शैक्षणिक गतिविधियों और विचार-विमर्श के लिए मंच तैयार करेगा। इसके माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों के शिक्षाविदों, बुद्धिजीवियों, सामाजिक प्रतिनिधियों, विद्यार्थियों और युवाओं को जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि, “यदि हम भारत को मजबूत और महान बनाना चाहते हैं तो युवाओं को संवाद, सम्मान और सहयोग का महत्व समझना होगा। क्रॉस-कल्चरल कार्यक्रम युवाओं को एक-दूसरे से संवाद करने और सीखने का रचनात्मक अवसर प्रदान कर सकते हैं।”
ट्रस्टी जावेद रहमानी ने कहा कि भारत की विविधता को विभाजन का कारण नहीं, बल्कि देश की ताकत के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आपसी सम्मान के साथ साथ रहना भारत के भविष्य की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद से लोगों को एक-दूसरे की परंपराओं और विचारों को समझने का अवसर मिलता है तथा गलतफहमियां दूर होती हैं।
कार्यक्रम में अधिवक्ता नदीम वारिस खान ने भी युवाओं और विद्यालयों को ऐसी पहलों से जोड़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।
आईआईसीएस की ओर से देश के विभिन्न हिस्सों में सेमिनार, सम्मेलन, शोध परियोजनाएं, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, व्याख्यान और युवा-केंद्रित कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है। इन गतिविधियों का उद्देश्य विभिन्न समुदायों के बीच आपसी समझ, संवाद और सहयोग को बढ़ावा देना होगा।
बैठक के समापन पर प्रतिभागियों ने सामाजिक सद्भाव, आपसी सहयोग और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। वक्ताओं ने कहा कि भारत की विविध सामाजिक और सांस्कृतिक विरासत को समझने तथा मजबूत बनाने में निरंतर संवाद की महत्वपूर्ण भूमिका है।
