एक किलो से अधिक की चेस्ट वॉल गांठ, फियोक्रोमोसाइटोमा और लिम्फैटिक मालफॉर्मेशन का किया सफल ऑपरेशन
आगरा, । सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (एसएन मेडिकल कॉलेज) के बाल शल्य चिकित्सा विभाग में हाल के दिनों में तीन जटिल एवं चुनौतीपूर्ण बाल शल्य चिकित्सा सफलतापूर्वक की गईं। कम उम्र के बच्चों में गंभीर और जटिल बीमारियों की सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर चिकित्सकों ने बच्चों को नया जीवन दिया।
तीनों ऑपरेशनों का नेतृत्व बाल शल्य चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. राजेश गुप्ता ने किया। चिकित्सकों के अनुसार, इन मामलों में बीमारी की प्रकृति और गांठों के आकार को देखते हुए सर्जरी काफी चुनौतीपूर्ण थी।
8 वर्षीय बच्ची की छाती से निकाली एक किलो से अधिक की गांठ
पहले मामले में 8 वर्षीय बच्ची की छाती की दीवार में करीब 12×10 सेंटीमीटर आकार की मायोफाइब्रोमा थी, जिसका वजन एक किलोग्राम से अधिक था। गांठ आसपास की मांसपेशियों और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी होने के कारण ऑपरेशन के दौरान रक्तस्राव का खतरा था।
सर्जरी में अत्याधुनिक हारमोनिक स्कैलपेल का इस्तेमाल किया गया। इससे रक्त वाहिकाओं को सील करते हुए रक्तस्राव को न्यूनतम रखने में मदद मिली और गांठ को पूरी तरह निकाल दिया गया। ऑपरेशन के बाद बच्ची की हालत में सुधार हुआ और उसे स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
10 वर्षीय बच्चे का फियोक्रोमोसाइटोमा निकाला
दूसरे मामले में 10 वर्षीय बालक में करीब 6×5 सेंटीमीटर का फियोक्रोमोसाइटोमा पाया गया था। बच्चों में यह एक दुर्लभ न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर है, जो शरीर में कैटेकोलामाइन्स का अत्यधिक स्राव कर सकता है।
इसकी सर्जरी के दौरान रक्तचाप और हृदय गति में अचानक उतार-चढ़ाव का खतरा रहता है। इसलिए ऑपरेशन से पहले बच्चे की विशेष चिकित्सकीय तैयारी और ऑपरेशन के दौरान विशेषज्ञ निश्चेतना एवं लगातार निगरानी की गई। सावधानीपूर्वक सर्जरी के बाद गांठ को सफलतापूर्वक निकाल लिया गया। बच्चे की हालत स्थिर रहने के बाद उसे स्वस्थ अवस्था में डिस्चार्ज कर दिया गया।
8 माह के शिशु की जटिल लिम्फैटिक मालफॉर्मेशन का उपचार
तीसरे मामले में केवल 8 माह के शिशु की छाती की दीवार और जबड़े के निचले हिस्से में बड़ी लिम्फैटिक मालफॉर्मेशन थी। इनके व्यापक फैलाव के कारण सर्जरी बेहद चुनौतीपूर्ण थी।
जबड़े के निचले हिस्से में ऑपरेशन के दौरान नसों, रक्त वाहिकाओं और आसपास की महत्वपूर्ण संरचनाओं को सुरक्षित रखना जरूरी था। विशेषज्ञों ने सूक्ष्म शल्य तकनीक के जरिए इन विकृतियों को सफलतापूर्वक हटा दिया। ऑपरेशन के बाद शिशु की स्थिति में सुधार हुआ और उसे स्वस्थ अवस्था में घर भेज दिया गया।
उन्नत बाल शल्य चिकित्सा का उदाहरण
डॉ. राजेश गुप्ता ने बताया कि बच्चों में जटिल शल्य स्थितियों का समय पर निदान, उचित ऑपरेशन-पूर्व योजना और अनुभवी बहु-विषयक टीम के सहयोग से सुरक्षित एवं प्रभावी उपचार संभव है।
एसएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने बाल शल्य चिकित्सा विभाग की इस उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे जटिल ऑपरेशनों की सफलता संस्थान में उपलब्ध उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाओं और विशेषज्ञों की दक्षता को दर्शाती है। कॉलेज प्रशासन मरीजों को बेहतर और अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
तीनों बच्चों की सफल सर्जरी के बाद स्वस्थ होकर घर लौटना उनके परिवारों के लिए राहत और खुशी का विषय है। साथ ही यह एसएन मेडिकल कॉलेज, आगरा में उन्नत बाल शल्य चिकित्सा सेवाओं की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि भी है।
