25 वर्षों की यात्रा में शिक्षा, सामाजिक कल्याण और अंतर-समुदाय संवाद को बनाया प्रमुख आधार
नई दिल्ली। ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड अपने रजत जयंती वर्ष के अवसर पर संगठन की अब तक की यात्रा, सामाजिक प्रभाव और जनकल्याणकारी गतिविधियों को याद करते हुए शांति, राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सद्भाव और अंतर-समुदाय संवाद के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया है।
संगठन के अनुसार, ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड की नींव वर्ष 1989 में उस समय पड़ी, जब धार्मिक एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कुछ समान विचारधारा वाले लोगों ने अल्लामा बुनई हसऩी के निवास पर बैठक कर एक ऐसे प्रभावी और एकजुट संगठन की आवश्यकता पर विचार किया, जो देश में साम्प्रदायिक सौहार्द, राष्ट्रीय एकीकरण और रचनात्मक संवाद को बढ़ावा दे सके। इसी विचार के तहत विभिन्न मसलकों और समुदायों को एक साझा मंच पर लाने की पहल हुई और बाद में संगठन का नाम “ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड” प्रस्तावित किया गया।
नेतृत्व की लंबी यात्रा
ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड के प्रथम अध्यक्ष पीर फखरू मियां चिश्ती, गद्दीनशीन, आस्ताना ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती, अजमेर रहे। संगठन के संस्थापक एवं महासचिव अल्लामा बुनई हसऩी स्थापना के समय से ही इसकी गतिविधियों और मिशन से जुड़े रहे हैं।
इसके बाद मौलाना नियाज अहमद कासमी, शाही इमाम, ईदगाह शाहजहानी, दिल्ली ने बोर्ड के दूसरे अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी संभाली। वर्तमान में मौलाना साहबुद्दीन सलफी फिरदौसी बोर्ड के तीसरे अध्यक्ष के रूप में कार्यरत हैं।
संगठन का कहना है कि विभिन्न चरणों में उसके नेतृत्व ने उलेमा, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और समुदाय के प्रतिनिधियों को एक साझा मंच पर लाकर संवाद और जनसेवा की दिशा में कार्य करने का प्रयास किया है।
धार्मिक संवाद से आगे सामाजिक सरोकारों पर जोर
ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड ने समय के साथ अपने कार्यक्षेत्र को केवल धार्मिक चर्चाओं तक सीमित न रखते हुए व्यापक सामाजिक मुद्दों से जोड़ने का प्रयास किया। संगठन के कार्यक्रमों और संवाद का उद्देश्य विभिन्न समुदायों के बीच आपसी समझ को मजबूत करना, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देना और नागरिकों में साझा राष्ट्रीय जिम्मेदारी की भावना विकसित करना रहा है।
बोर्ड ने धार्मिक विद्वानों और सामाजिक नेताओं के साथ-साथ पेशेवरों, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सिविल सोसाइटी से जुड़े लोगों को भी संवाद के मंच पर लाने की कोशिश की है। संगठन का मानना है कि आम नागरिकों से जुड़े सामाजिक मुद्दों के समाधान के लिए विभिन्न वर्गों के बीच सहयोग और संवाद आवश्यक है।
शिक्षा और सामाजिक कल्याण को प्राथमिकता
बोर्ड की गतिविधियों में शिक्षा और सामाजिक कल्याण को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। संगठन के अनुसार, शैक्षिक जागरूकता बढ़ाने, सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने और समाज के वंचित वर्गों के उत्थान के लिए कार्य करने वाले लोगों को प्रोत्साहित करने की दिशा में भी पहल की जाती रही है।
बोर्ड का मानना है कि विभिन्न समुदायों के बीच सकारात्मक और रचनात्मक संवाद सामाजिक चुनौतियों से निपटने तथा एक समावेशी समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वालों का सम्मान
ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली हस्तियों को सम्मानित भी करता है। संगठन की ओर से शिक्षा, सामाजिक सेवा, मानवतावादी कार्य, महिला सशक्तीकरण, पत्रकारिता, कला, समावेशी राजनीति, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा, कॉरपोरेट क्षेत्र और व्यापार सहित विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाले लोगों को पुरस्कार प्रदान किए जाते हैं।
बोर्ड के अनुसार, इन सम्मानों का उद्देश्य समाज के लिए सकारात्मक कार्य करने वाले व्यक्तियों को प्रोत्साहित करना और उनके योगदान को सार्वजनिक रूप से सम्मान देना है, ताकि अन्य लोग भी जनकल्याण के कार्यों के लिए प्रेरित हो सकें।
सुप्रीम बॉडी और अवॉर्ड्स ज्यूरी
ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड की सुप्रीम बॉडी एवं अवॉर्ड्स ज्यूरी में एडवोकेट अमजद खान, लखनऊ; सैयद मुजफ्फर अली, अजमेर; मुफ्ती ताहिर हुसैन मजाहिरी, दिल्ली; मौलाना नौशाद अहमद सिद्दीकी, दरभंगा; बादशाह खान, रांची; मुफ्ती खालिद आजम हैदरी, कोलकाता; काजी रिजवान उल रहमान सिद्दीकी, गुलबर्गा; मौलाना रियाजुद्दीन नक्शबंदी, हैदराबाद तथा प्रिंसिपल डॉ. जेबा मलिक, मुंबई शामिल हैं।
शांति और राष्ट्रीय एकता के लिए आगे भी जारी रहेगा प्रयास
रजत जयंती वर्ष के अवसर पर ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड ने कहा है कि संगठन भविष्य में भी शांति, सामाजिक सद्भाव, अंतर-समुदाय संवाद, शिक्षा, सामाजिक कल्याण और राष्ट्रीय एकता के लिए अपने प्रयास जारी रखेगा।
बोर्ड का उद्देश्य देश के विभिन्न समुदायों और वर्गों के बीच संवाद को मजबूत करते हुए ऐसा वातावरण तैयार करना है, जहां विविधता के बावजूद आपसी सम्मान, सहयोग और भाईचारे की भावना कायम रहे।
शमीम अहमद खान
कन्वीनर एवं अध्यक्ष, दिल्ली स्टेट
ऑल इंडिया उलेमा बोर्ड
