शिकायतकर्ता और गवाह के कथित हलफनामों में दबाव में नाम शामिल किए जाने का आरोप; CCTV फुटेज को बताया अहम सबूत, 82 मिनट के अंतराल में निलंबन आदेश जारी होने पर भी उठे सवाल
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में छात्र नेता अमजद अली उर्फ अमजद सिवान के खिलाफ आपराधिक मामले में नामजदगी और विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से निलंबन की कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। अमजद ने आरोप लगाया है कि उन्हें एक मामले में गलत तरीके से फंसाया गया और विश्वविद्यालय प्रशासन के दबाव में उनका नाम मामले में शामिल कराया गया।
अमजद के अनुसार, घटना के समय वह डॉ. बी.आर. अंबेडकर हॉल में मौजूद थे, जबकि कथित घटना आरएम हॉल में हुई थी। उनका कहना है कि CCTV फुटेज से उनकी वास्तविक लोकेशन स्पष्ट हो सकती है और उन्होंने संबंधित CCTV रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के साथ-साथ RTI के माध्यम से भी इसकी जानकारी मांगी है।
शिकायतकर्ता और गवाह के हलफनामों से बढ़ा विवाद
मामले में नया मोड़ उस समय आया जब शिकायतकर्ता और एक गवाह की ओर से कथित तौर पर हलफनामे प्रॉक्टर कार्यालय में प्रस्तुत किए गए। अमजद के मुताबिक, ये दस्तावेज 7 सितंबर को लगभग रात 8:40 बजे आवेदन संख्या 4618/Proc के तहत जमा किए गए।
अमजद का दावा है कि शिकायतकर्ता हारिस फहीम के हलफनामे में एक अधिकारी द्वारा दबाव बनाए जाने और अमजद अली का नाम मामले में शामिल करने का आरोप लगाया गया है। कथित गवाह के हलफनामे में भी यह कहा गया है कि उसे अमजद के घटनास्थल पर मौजूद होने की जानकारी नहीं थी और उनका नाम कथित दबाव में शामिल किया गया।
हालांकि, इन हलफनामों में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
CCTV फुटेज पर टिकी अमजद की दलील
अमजद का कहना है कि यदि संबंधित समय की CCTV रिकॉर्डिंग सुरक्षित और निष्पक्ष रूप से जांची जाती है तो यह स्पष्ट हो सकता है कि वह घटना के समय आरएम हॉल में थे या नहीं।
उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से संबंधित CCTV फुटेज को संरक्षित करने की मांग की है। उनका कहना है कि इस मामले में इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड, विश्वविद्यालय के दस्तावेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्य को निष्पक्ष जांच का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
हलफनामे के करीब 82 मिनट बाद निलंबन आदेश
अमजद ने निलंबन की टाइमिंग पर भी सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक, शिकायतकर्ता और गवाह के कथित हलफनामे रात करीब 8:40 बजे प्रॉक्टर कार्यालय में जमा हुए, जबकि उन्हें निलंबन आदेश की जानकारी ईमेल के माध्यम से रात करीब 10:02 बजे दी गई।
अमजद के अनुसार दोनों घटनाओं के बीच लगभग 82 मिनट का अंतर है। उनका सवाल है कि इतनी कम अवधि में प्रस्तुत हलफनामों, CCTV से जुड़े दावों और अन्य दस्तावेजों की पर्याप्त जांच किस प्रकार की गई।
उन्होंने देर रात निलंबन आदेश ईमेल किए जाने के तरीके पर भी आपत्ति जताई है।
हॉर्स राइडिंग क्लब की जमीन का मुद्दा उठाने के बाद निशाना बनाने का आरोप
अमजद सिवान का आरोप है कि वह लंबे समय से विश्वविद्यालय से जुड़े विभिन्न मुद्दों को RTI, शिकायतों और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से उठाते रहे हैं। उन्होंने AMU हॉर्स राइडिंग क्लब की जमीन से जुड़े कथित अतिक्रमण का मुद्दा भी उठाया है, जो इलाहाबाद हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है।
अमजद का कहना है कि इस मुद्दे पर आवाज उठाने के बाद उन्हें व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाए जाने का उन्हें संदेह है। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी सक्रियता को दबाने और उनके भविष्य तथा करियर को नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है।
‘मुझे अपनी सुरक्षा की चिंता है’
रिपोर्टर से बातचीत में अमजद सिवान ने अपनी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाने के कारण उन्हें लगता है कि उन्हें अलग-थलग करने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने अपनी जान-माल और स्वतंत्रता की सुरक्षा को लेकर आशंका व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें डर है कि उनके खिलाफ शारीरिक नुकसान पहुंचाने का भी प्रयास हो सकता है।
इन सुरक्षा संबंधी आशंकाओं की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
निष्पक्ष जांच की मांग
पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि अमजद वास्तव में घटनास्थल पर मौजूद थे या नहीं और उनका नाम मामले में किन परिस्थितियों में शामिल किया गया।
किसी आपराधिक मामले में नामजद होना अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। ऐसे में शिकायतकर्ता और गवाह के कथित हलफनामे, CCTV फुटेज, विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड और अन्य इलेक्ट्रॉनिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
अमजद द्वारा लगाए गए झूठे मुकदमे में फंसाने, दबाव बनाने और छात्र सक्रियता के कारण निशाना बनाए जाने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी बाकी है। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन का पक्ष भी इस रिपोर्ट में शामिल किया जाना आवश्यक होगा।
अब निगाह इस बात पर है कि मामले की जांच आरोपों के आधार पर आगे बढ़ती है या उपलब्ध दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के आधार पर।
