नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर निर्वाचन आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं। केजरीवाल ने मांग की है कि देशभर में चल रही SIR प्रक्रिया को पूरी तरह रद्द किया जाए, इसके तहत किए गए बदलाव वापस लिए जाएं और तीन साल पुरानी मतदाता सूची बहाल की जाए।
केजरीवाल ने यह प्रतिक्रिया इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट के बाद दी, जिसमें दावा किया गया है कि निर्वाचन आयोग के दो चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी—ने पिछले करीब 10 महीनों में आयोग के कामकाज और SIR से जुड़े विभिन्न फैसलों पर कई बार आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने, फॉर्म-6 में बदलाव तथा चुनावी आंकड़ों से जुड़े मामलों पर आपत्तियों का उल्लेख किया गया है।
केजरीवाल ने आरोप लगाया कि इन घटनाक्रमों से यह सवाल उठता है कि क्या निर्वाचन आयोग के फैसले निर्धारित संस्थागत प्रक्रिया के अनुरूप लिए जा रहे थे। उन्होंने दावा किया कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार आयोग को अपने स्तर पर चला रहे थे और इसी आधार पर उन्होंने SIR की पूरी प्रक्रिया को अवैध बताते हुए उसे रद्द करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि SIR के दौरान मतदाता सूचियों में किए गए सभी बदलावों को निरस्त किया जाना चाहिए और तीन वर्ष पहले की मतदाता सूची को बहाल किया जाना चाहिए। केजरीवाल ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गिरफ्तारी तथा उनके खिलाफ देशद्रोह के तहत मुकदमा चलाने की भी मांग की।
निर्वाचन आयोग ने दी अलग तस्वीर
वहीं, निर्वाचन आयोग ने इन आरोपों और रिपोर्ट की व्याख्या पर अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि किसी संस्थान में विचारों और टिप्पणियों में अंतर होना निर्णय लेने की प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा है। आयोग के अनुसार पिछले एक वर्ष में लिए गए फैसले, जिनमें SIR से जुड़े निर्णय भी शामिल हैं, पूर्ण आयोग की सर्वसम्मत स्वीकृति से लिए गए हैं।
इस तरह SIR और निर्वाचन आयोग की आंतरिक निर्णय प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। एक ओर विपक्षी दल रिपोर्ट में सामने आई आपत्तियों को आधार बनाकर आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं निर्वाचन आयोग ने अपने सभी प्रमुख फैसलों को पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिया गया बताया है।
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