बच्चों में किताबें पढ़ने की रुचि पैदा करनी होगी, उर्दू को जीवित रखने के लिए लिपि का संरक्षण भी जरूरी: डॉ. अरशद रजा
दो दिवसीय वाद-विवाद एवं भाषण प्रतियोगिता का सफल समापन
भागलपुर: उर्दू भाषा एवं साहित्य के विकास तथा विद्यार्थियों में उर्दू भाषा के प्रति रुचि पैदा करने के उद्देश्य से उर्दू निदेशालय, पटना के तत्वावधान में जिला उर्दू भाषा प्रकोष्ठ, भागलपुर की ओर से उर्दू भाषी विद्यार्थियों के प्रोत्साहन राज्य योजना 2025-26 के तहत आयोजित दो दिवसीय वाद-विवाद एवं भाषण प्रतियोगिता का सोमवार को असानंदपुर स्थित मुस्लिम माइनॉरिटी डिग्री कॉलेज में सफल समापन हुआ। दूसरे दिन स्नातक एवं समकक्ष स्तर के छात्र-छात्राओं ने विभिन्न विषयों पर उर्दू में अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम की शुरुआत करीब 11 बजे हुई। विद्यार्थियों ने अपनी भाषा, अभिव्यक्ति शैली, तर्क और आत्मविश्वास से उपस्थित लोगों को प्रभावित किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता मुंगेर विश्वविद्यालय, मुंगेर के विश्वविद्यालय पीजी उर्दू विभागाध्यक्ष प्रोफेसर शाहिद रजा जमाल ने की। उन्होंने कहा कि उर्दू में अपनी बात और विचार प्रस्तुत करने का सलीका एवं अंदाज इस भाषा की प्रमुख विशेषता है। उर्दू केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि इसके साथ हमारी संस्कृति और सभ्यता भी जुड़ी हुई है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि उर्दू के विकास के लिए केवल सरकारी संस्थानों पर निर्भर रहने के बजाय घरों से भी भाषा के संरक्षण और विकास का प्रयास शुरू करें तथा स्वयं आगे बढ़कर काम करें।
हुमायूं हुमा ने कहा कि उर्दू भाषा के विकास के लिए इसकी बुनियाद को मजबूत करने की जरूरत है। बच्चों में किताबें पढ़ने की रुचि पैदा करनी होगी और उन्हें उर्दू की पुस्तकों से जोड़ना होगा। नई पीढ़ी को उर्दू पढ़ने, लिखने और बोलने के लिए प्रेरित किए बिना भाषा के विकास का प्रयास पूरा नहीं हो सकता।डॉ. अरशद रजा ने कहा कि उर्दू को जीवित रखने के लिए उसकी लिपि को भी जीवित रखना जरूरी है। उर्दू भाषा के साथ उसकी लिपि की रक्षा करना भी हमारी जिम्मेदारी है। इस दिशा में गंभीरता से विचार करने और व्यावहारिक कदम उठाने की जरूरत है।प्रतियोगिता में निर्णायक की भूमिका प्रोफेसर शाहिद रजा जमाल, हुमायूं हुमा, डॉ. अख्तर आजाद, उर्दू विभाग, टीएनबी कॉलेज, डॉ. अरशद रजा, रजौन कॉलेज, बांका तथा डॉ. नाहिद फातिमा, एसएम कॉलेज ने निभाई। जिला उर्दू भाषा प्रकोष्ठ के प्रभारी अधिकारी साकिब अहमद की देखरेख में आयोजित कार्यक्रम में डॉ. हबीब मुर्शिद खान, कलीम आजर, मोहम्मद आसिफ अंसारी सहित जिले के उर्दू कार्यकर्ता और उर्दू प्रेमी बड़ी संख्या में मौजूद थे।
दो दिवसीय प्रतियोगिता में मैट्रिक, इंटरमीडिएट और स्नातक स्तर के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। सफल प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र, मेडल और नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
मैट्रिक वर्ग में प्रथम मोहम्मद फैजान, द्वितीय तस्मिया अफरोज, मोहम्मद शाबान अंसारी और शफक परवीन, जबकि तृतीय काइनात खानम, मुफ्ताहुल हक, सारा आजाद और कहकशां परवीन रहीं।
इंटरमीडिएट वर्ग में प्रथम जुवैरिया, द्वितीय तजईन, इकरा खातून और आशना वारसी, जबकि तृतीय जाहिदा, सानिया, सादिया और दरख्शां रहीं।
स्नातक वर्ग में प्रथम बुशरा परवीन, द्वितीय बी मेहर अफशां, मोहम्मद अफरोज अंसारी और आशना निशात, जबकि तृतीय बी तराना, मोहम्मद रागिब, हादिया कौसर और शाहिना परवीन शामिल रहीं।
वक्ताओं ने कहा कि इस तरह की प्रतियोगिताओं से विद्यार्थियों को उर्दू में अपने विचार व्यक्त करने का व्यावहारिक अवसर मिलता है। इससे उनमें आत्मविश्वास, पढ़ने की आदत और भाषा के प्रयोग की क्षमता विकसित होती है। कार्यक्रम के समापन पर सफल छात्र-छात्राओं का उत्साहवर्धन किया गया तथा उर्दू भाषा एवं साहित्य के विकास के लिए लगातार प्रयास जारी रखने पर जोर दिया गया।
कार्यक्रम को सफल बनाने वालों में जिया उल हक,अहमद रजा, आसिफ,नितेश,अकमल, नाज फातिमा, मिथुन,शाहिद आदि की प्रमुख भूमिका रही।
