लखनऊ। उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी ने अपने उम्मीदवारों के नाम सामने रखकर सियासी हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। पार्टी ने वरिष्ठ नेता प्रो. रामगोपाल यादव के साथ धनराज परिमल नथवानी को राज्यसभा का प्रत्याशी बनाया है।
रामगोपाल यादव का नाम सपा की राजनीति और संसदीय अनुभव का जाना-पहचाना चेहरा है, लेकिन धनराज नथवानी का नाम सामने आते ही सवाल उठने लगे कि आखिर सपा ने कॉरपोरेट और खेल जगत से जुड़े इस चेहरे पर दांव क्यों लगाया?
एक नाम… और कई कनेक्शन
धनराज नथवानी राजनीति के पारंपरिक रास्ते से नहीं आए हैं। वह कॉरपोरेट जगत के साथ-साथ खेल प्रशासन और सामाजिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। रिलायंस न्यू एनर्जी लिमिटेड में निदेशक की भूमिका निभाने वाले धनराज का खेल जगत में भी जुड़ाव रहा है।
गुजरात क्रिकेट और फुटबॉल प्रशासन से उनके संबंध रहे हैं। शिक्षा के स्तर पर भी उनकी पृष्ठभूमि इंटरनेशनल बिजनेस और कॉरपोरेट मैनेजमेंट से जुड़ी रही है।
यही वजह है कि सपा के इस चयन को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का दायरा सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं है।
पिता परिमल नथवानी का भी बड़ा नाम
धनराज नथवानी के पिता परिमल नथवानी लंबे समय से कॉरपोरेट और संसदीय राजनीति में सक्रिय हैं। वह रिलायंस इंडस्ट्रीज से जुड़े रहे हैं और राज्यसभा के सदस्य भी रहे हैं।
जून 2026 में परिमल नथवानी झारखंड से NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा पहुंचे। इससे पहले भी वह झारखंड और आंध्र प्रदेश से राज्यसभा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
यानी एक ही परिवार के दो सदस्यों का राजनीतिक सफर अलग-अलग राजनीतिक समीकरणों से जुड़ा दिखाई देता है।
सपा के फैसले ने बढ़ाए सियासी सवाल
धनराज नथवानी की उम्मीदवारी के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की है कि सपा ने एक ओर अपने पुराने और भरोसेमंद संसदीय चेहरे रामगोपाल यादव को चुना, तो दूसरी ओर कॉरपोरेट और खेल जगत से आने वाले नए चेहरे को संसद भेजने का रास्ता खोला।
क्या यह सिर्फ राज्यसभा के लिए उम्मीदवार का चयन है या सपा की भविष्य की रणनीति का भी संकेत? फिलहाल इसका स्पष्ट जवाब सामने नहीं है।
लेकिन इतना जरूर है कि धनराज नथवानी के नाम ने उत्तर प्रदेश के राज्यसभा चुनाव को एक नया राजनीतिक एंगल दे दिया है।
अब निगाहें 16 अक्टूबर के मतदान पर हैं, जब उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होगा।
