आगरा। दरगाह हज़रत सय्यदना शाह अमीर अबुल उला (रह.) के प्रांगण में गुरुवार, 1 अक्टूबर को सालाना जलसा जश्न-ए-गौस-ए-आज़म का आयोजन किया गया। कार्यक्रम मौरूसी सज्जादानशीन सैय्यद मोहतशिम अली अबुल उलाई तथा नायब सज्जादगान सैय्यद ईशाअत अली अबुल उलाई और सैय्यद कैफ़ अली अबुल उलाई की मौजूदगी में संपन्न हुआ।

कार्यक्रम की शुरुआत दरगाह मस्जिद के इमाम अब्दुल वहाब साहब द्वारा कुरआन शरीफ की आयतों की तिलावत से हुई। इसके बाद हज़रत मुफ्ती मोहम्मद सुलेमान मंज़री, इमाम शाही जामा मस्जिद आगरा ने खिताब किया। वहीं जनाब ज़ौहर फ़िरोज़ाबादी, जनाब कमर वारसी फ़िरोज़ाबादी और हाफिज़ अफ़ज़ल रज़ा कादरी ने अपने कलाम पेश किए। कार्यक्रम की निज़ामत अरशद रज़वी (फ़िरोज़ाबाद) ने की।
जलसे के दौरान महफिल-ए-समां का भी आयोजन किया गया। वक्ताओं ने अल्लाह के वली हज़रत अब्दुल कादिर जिलानी (रह.) यानी गौस-ए-आज़म की आला सीरत और उनकी करामात पर रोशनी डाली। इस दौरान गौस-ए-आज़म की शान में मनकबती कलाम पेश किए गए।

दरबार-ए-सैय्यदना सरकार में मुल्क की तरक्की, अमन-चैन, आपसी एकता और भाईचारे के लिए विशेष दुआएं भी की गईं।

जलसे में सैय्यद मेहराजुद्दीन, सैय्यद मुकर्ररम अली (शहर काज़ी), सैय्यद अरीब अली, सैय्यद शहाब अली, सैय्यद अज़हर अली, सैय्यद फहीम-उज़-जमा, सैय्यद अशफाक अहमद, सैय्यद अली अहमद सहित सूफी हज़रात और बड़ी संख्या में जायरीन ने शिरकत की। इसके अलावा वकील अहमद क़ादरी, हाजी इरशाद, हाजी नौशाद और शफीक समेत अन्य लोग भी मौजूद रहे।
जायरीनों और अकीदतमंदों की मौजूदगी से दरगाह परिसर में रूहानी माहौल बना रहा और जलसे में अकीदतमंदों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
