मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में रविवार को उस समय नया राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला, जब लंबे समय बाद शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) अध्यक्ष राज ठाकरे एक ही मंच पर नजर आए। दोनों नेताओं ने मुंबई में संयुक्त रूप से ‘विराट गर्जना मोर्चा’ निकालकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया।
मार्च की शुरुआत मेट्रो सिनेमा से हुई और यह बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) मुख्यालय की ओर बढ़ा। प्रदर्शन में कांग्रेस और शरद पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) के नेताओं व कार्यकर्ताओं ने भी भाग लिया।
प्रदर्शनकारियों ने चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और महाराष्ट्र में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की।
‘सरकार चुनने का अधिकार जनता का’
राज ठाकरे ने कहा कि सरकार चुनने का अधिकार जनता का है, चुनाव आयोग का नहीं। उन्होंने महाराष्ट्र में SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे समाप्त करने की मांग की। राज ठाकरे ने यह भी कहा कि देश में ईवीएम के बजाय दोबारा बैलेट पेपर से मतदान कराया जाना चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि महाराष्ट्र में SIR के बाद बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं हैं और इस प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों को मिलकर आवाज उठानी चाहिए।
उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग पर उठाए सवाल
उद्धव ठाकरे ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में लोगों के मतदान के अधिकार को प्रभावित किया जा रहा है। उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दे को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ते हुए विरोध तेज करने की बात कही।
हालांकि, मतदाता सूची में नामों के शामिल न होने को लेकर चुनाव अधिकारियों का कहना है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे एन्यूमरेशन फॉर्म वापस नहीं मिल सके, जिनके पीछे मतदाताओं के स्थान बदलने, मृत्यु या अन्य कारण बताए गए हैं। महाराष्ट्र की ड्राफ्ट मतदाता सूची में करीब 2.07 करोड़ नाम शामिल नहीं हो पाए, जबकि अंतिम सूची 4 नवंबर को प्रकाशित होने वाली है।
ठाणे से भी पहुंचे कार्यकर्ता
मुंबई के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए ठाणे से भी बड़ी संख्या में शिवसेना (यूबीटी), मनसे और NCP-SP के कार्यकर्ता लोकल ट्रेन से मुंबई पहुंचे। रवानगी के दौरान कार्यकर्ताओं ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर नारे लगाए।
प्रदर्शन के दौरान “ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो” जैसे नारे भी लगाए गए। ये नारे प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोपों और विरोध का हिस्सा थे।
लंबे समय बाद एक मंच पर ठाकरे बंधु
उद्धव और राज ठाकरे का एक ही राजनीतिक मुद्दे पर साथ आना इस प्रदर्शन की सबसे महत्वपूर्ण बात रही। दोनों अलग-अलग राजनीतिक दलों का नेतृत्व करते हैं और लंबे समय से उनके राजनीतिक रास्ते अलग रहे हैं। ऐसे में चुनावी प्रक्रिया और SIR के मुद्दे पर उनका संयुक्त आंदोलन महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है।
दोनों दलों ने इस आंदोलन को चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाता सूची से जुड़े सवालों को लेकर जनआंदोलन के रूप में पेश किया है। वहीं, चुनाव आयोग और भाजपा इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं।
Times of Taj डिस्क्लेमर: इस समाचार में नेताओं और प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए आरोपों एवं दिए गए बयानों को संबंधित पक्षों के दावों के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि को समाचार में तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।
