उलमा-ए-किराम की मौजूदगी में हुई फातिहा ख्वानी, बाद नमाज-ए-मगरिब लंगर का एहतमाम
आगरा। मिढ़ाकुर स्थित खानकाह-ए-शफीकी एवं मदरसा बाले पीर एजुकेशन एकेडमी में शनिवार, 10 अक्टूबर 2026 को हर माह की तरह इस माह भी हजरत सुल्तान सैयद मखदूम अशरफ जहांगीर सिमनानी रहमतुल्लाह अलैह की महाना फातिहा ख्वानी के अवसर पर जश्न-ए-गौस-ए-आज़म और हजरत शेख मोहम्मद शफीक अलमारूफ बाबा लाल शाह कादरी अशरफी रहमतुल्लाह अलैह के नाम से ईसाले सवाब का कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत बाद नमाज-ए-जुहर हुई। इसके बाद नमाज-ए-असर के बाद जलसा आयोजित किया गया और नमाज-ए-मगरिब के बाद फातिहा ख्वानी एवं लंगर का एहतमाम किया गया। इस दौरान उलमा-ए-किराम, खानकाह से जुड़े लोगों, मुरीदीन और अकीदतमंदों ने शिरकत की।
कार्यक्रम की सरपरस्ती आगरा के आजमपाड़ा स्थित हजरत मीर शाह बाले मियांई ने की। जलसे की सदारत शहजादा-ए-शफीके मिल्लत हजरत पीरजादा शेख मोहम्मद आमिर कादरी शफीकी अशरफी नियाजी साहब ने की।
कार्यक्रम में बतौर मेहमान हाफिज इरफान कादरी, हाफिज रजाउद्दीन रजवी, हाफिज नजीर रजा, हाफिज व कारी मोहम्मद जहूर रजा, मौलाना मोहम्मद नासिर (इमाम, शाही मस्जिद बोदला) तथा हाफिज अर्श कादरी शफीकी (सदर मुदर्रिस, मदरसा बाले पीर एजुकेशन एकेडमी, मिढ़ाकुर, आगरा) सहित अन्य अकीदतमंद मौजूद रहे।
कार्यक्रम का इंतजाम खानकाह-ए-शफीकी के नायब सज्जादानशीन पीरजादा शेख मोहम्मद सलमान कादरी शफीकी अशरफी और खादिम-ए-खास सूफी शाकिर कादरी शफीकी अशरफी ने संभाला।
महाना फातिहा ख्वानी, जलसे और लंगर के माध्यम से अकीदतमंदों ने बुजुर्गाने-दीन को खिराज-ए-अकीदत पेश किया और ईसाले सवाब किया।
— TIMES OF TAJ
