मेनका गुरुस्वामी ने दाखिल की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका, अयाज़ खान अच्छू ने लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मामले पर जताई नजर
नई दिल्ली। दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के दौरान विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद एवं वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने हिरासत को चुनौती देते हुए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की है। सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ 11 अक्टूबर, रविवार को इस मामले की सुनवाई करेगी।
Bar & Bench और LiveLaw की रिपोर्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ मामले की सुनवाई करेगी। याचिका में दिल्ली पुलिस की कार्रवाई और विभिन्न विपक्षी नेताओं को एहतियातन हिरासत में लिए जाने को चुनौती दी गई है।
याचिका में पूर्व मुख्यमंत्रियों अरविंद केजरीवाल, ममता बनर्जी, पिनराई विजयन और माणिक सरकार सहित अन्य नेताओं की हिरासत का मुद्दा उठाया गया है। याचिकाकर्ता ने शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के मौलिक अधिकार और हिरासत की वैधता पर सवाल उठाए हैं। इन आरोपों और दलीलों पर न्यायालय का निर्णय आना बाकी है।
इस मामले को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ कार्यकर्ता एवं राहुल गांधी द्वारा ‘न्याय योद्धा’ सम्मान से सम्मानित अयाज़ खान अच्छू ने भी ध्यान आकर्षित किया है। उन्होंने संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों से जुड़े सवालों के संदर्भ में मामले के न्यायिक पहलुओं पर नजर रखने की आवश्यकता जताई।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई में हिरासत की वैधता और संबंधित संवैधानिक सवालों पर विचार किया जाएगा।
स्रोत: Bar & Bench, LiveLaw
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