रिपोर्ट: शोज़ब मुनीर
अलीगढ़ की प्रसिद्ध सामाजिक संस्था सिटिजन सोसाइटी के तत्वावधान में शहर की प्राचीन बस्ती ऊपरकोट, मुहम्मद अली रोड स्थित इम्तियाज मार्केट में अली रज़ा खान स्टडी सेंटर का उद्घाटन किया गया। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की उर्दू अकादमी के निदेशक प्रोफेसर जुबैर शादाब ने स्टडी सेंटर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर शिक्षा के प्रसार, विद्यार्थियों के मार्गदर्शन, प्रतियोगी परीक्षाओं और सिविल सेवा की तैयारी के अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ उर्दू साहित्य और तहजीब के संरक्षण पर जोर दिया गया। कार्यक्रम के तहत मुशायरे का भी आयोजन किया गया, जिसमें प्रसिद्ध शायरों ने अपना कलाम पेश किया और श्रोताओं से खूब वाहवाही हासिल की।

कार्यक्रम की अध्यक्षता ऑल इंडिया मुस्लिम एजुकेशनल कॉन्फ्रेंस के महासचिव प्रोफेसर रज़ाउल्लाह खान ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में अलीगढ़ के पूर्व मेयर और इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर के उपाध्यक्ष मुहम्मद फरकान मौजूद रहे। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी उमर सलीम पीरजादा ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की। इस अवसर पर सिटिजन सोसाइटी की ओर से अलीगढ़ के प्रसिद्ध शायर जॉनी फास्टर को शफक इमाम मेमोरियल अवार्ड 2026 से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के आयोजक मुहम्मद अहमद शिवान ने अतिथियों का स्वागत किया, जबकि संचालन प्रसिद्ध शायर डॉ. मुजीब शहजर ने किया।
प्रोफेसर जुबैर शादाब ने अपने उद्घाटन भाषण में कहा कि किसी भी शहर की प्राचीन बस्तियां केवल गलियों और इमारतों का समूह नहीं होतीं, बल्कि वे उस शहर के इतिहास, तहजीब, संस्कृति और सामाजिक जीवन की वास्तविक झलक पेश करती हैं। इन बस्तियों में कई पीढ़ियों की यादें और सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहती है। इसलिए जरूरी है कि इन क्षेत्रों की ऐतिहासिक पहचान को बनाए रखते हुए वहां शिक्षा और विकास के नए अवसर उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने कहा कि अलीगढ़ की पहचान ज्ञान और शिक्षा की परंपरा से जुड़ी हुई है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की स्थापना और उसके विकास में स्थानीय लोगों के योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। ऊपरकोट जैसे प्राचीन क्षेत्रों का भी शहर के सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। ऐसे क्षेत्रों में शैक्षिक सुविधाएं और अध्ययन केंद्र स्थापित करना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
प्रोफेसर जुबैर शादाब ने अली रज़ा खान स्टडी सेंटर की स्थापना को सराहनीय कदम बताते हुए कहा कि इस तरह के केंद्र विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराने के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं और सिविल सेवा की तैयारी में भी मददगार साबित हो सकते हैं। शिक्षा ही वह माध्यम है, जिसके जरिए नई पीढ़ी अपने भविष्य को बेहतर बना सकती है और समाज के विकास में अपनी भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि ऊपरकोट में इस दिशा में किया जा रहा कार्य प्रशंसनीय है। उन्होंने आगे कहा कि वह स्टडी सेंटर के संबंध में कुछ ऐसी परियोजनाएं शुरू करने का भी प्रयास करेंगे, जिनसे भविष्य में क्षेत्र के विद्यार्थियों और आम लोगों को लाभ मिल सके।
मुख्य अतिथि मुहम्मद फरकान ने कहा कि प्राचीन शहर ऊपरकोट अलीगढ़ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस क्षेत्र में स्टडी सेंटर की स्थापना एक सराहनीय पहल है। किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए शिक्षा सबसे प्रभावी माध्यम है। यदि विद्यार्थियों को अपने ही क्षेत्र में अध्ययन, मार्गदर्शन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की सुविधाएं मिलें, तो वे बेहतर परिणाम हासिल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक संगठनों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे आकर ऐसे प्रयास करने चाहिए, ताकि आर्थिक और शैक्षिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को भी आगे बढ़ने के अवसर मिल सकें।
प्रोफेसर रज़ाउल्लाह खान ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि शिक्षा किसी भी समाज की नींव होती है। समाज में वास्तविक बदलाव तभी संभव है, जब बच्चों और युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, उचित मार्गदर्शन और आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। पुराने शहर के क्षेत्रों में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, बल्कि जरूरत इस बात की है कि विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षिक वातावरण और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। उन्होंने कहा कि अली रज़ा खान स्टडी सेंटर जैसे संस्थान विद्यार्थियों में शिक्षा के प्रति रुचि पैदा करने और उन्हें अपने लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने आयोजकों के प्रयासों की सराहना करते हुए ऐसे कार्यों में सामूहिक सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।
विशिष्ट अतिथि उमर सलीम पीरजादा ने कहा कि शिक्षा और साहित्य समाज के बौद्धिक विकास के दो महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। स्टडी सेंटर विद्यार्थियों में पढ़ने की आदत, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच विकसित करने में मददगार साबित हो सकते हैं। उन्होंने अली रज़ा खान स्टडी सेंटर की स्थापना को एक सकारात्मक और सराहनीय कदम बताते हुए आयोजकों को बधाई दी। उन्होंने अपनी ओर से स्टडी सेंटर को हर संभव सहयोग उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया और तत्काल 25 बच्चों को छात्रवृत्ति देने की घोषणा भी की। उनकी इस घोषणा को विद्यार्थियों की शैक्षिक सहायता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया गया।
कार्यक्रम के आयोजक मुहम्मद अहमद शिवान ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि अली रज़ा खान स्टडी सेंटर की स्थापना का उद्देश्य क्षेत्र के विद्यार्थियों को शिक्षा के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना और उन्हें अपना भविष्य संवारने के लिए प्रोत्साहित करना है। ऊपरकोट जैसे प्राचीन क्षेत्र में इस तरह के केंद्र की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। सिटिजन सोसाइटी का प्रयास है कि शिक्षा और साहित्य के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जाए और नई पीढ़ी को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराए जाएं।
संचालन करते हुए प्रसिद्ध शायर डॉ. मुजीब शहजर ने कहा कि वर्तमान समय में इस तरह के कार्यक्रम बेहद जरूरी हैं, क्योंकि ये शिक्षा, साहित्य और सामाजिक चेतना को एक मंच पर लाते हैं। उन्होंने कहा कि उर्दू शायरी समाज के विभिन्न पहलुओं को इस तरह अभिव्यक्त करती है कि सही बात को सही अंदाज में कहने का हुनर सामने आता है। शायरी समाज की खूबियों, कमियों, समस्याओं, संघर्षों और उम्मीदों को ऐसे अंदाज में पेश करती है, जो सीधे लोगों के दिलों तक पहुंचता है। उन्होंने कहा कि मुशायरा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि नई पीढ़ी को उर्दू भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का एक प्रभावी साधन भी है।
मुशायरे में प्रोफेसर सरवर साजिद, जॉनी फास्टर, डॉ. ओवैस जमाल शम्सी, बाबर इलियास, जावेद अख्तर वारसी, सैयद मुशर्रफ हुसैन महजर, नसीम नूरी, डॉ. कमाल अहमद मुजीबी, नसीर नादान, मुज्तर जलीसरी, सरवर पटीयालवी, मेराज हसन निशात, फराज मुजीब, डॉ. मुजीब शहजर, काजिम रिजवी, अरमान खान और हाशिम रज़ा सहित अन्य शायरों ने अपना कलाम पेश किया। श्रोताओं ने शायरों के कलाम की खूब सराहना की और विभिन्न अशआर पर वाहवाही देकर महफिल को साहित्यिक रंग प्रदान किया। इस अवसर पर आइजा कामरान ने अपने खूबसूरत अंदाज में सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। वहीं, प्रसिद्ध शायर जॉनी फास्टर को शफक इमाम मेमोरियल अवार्ड 2026 से सम्मानित किया गया। इस सम्मान के माध्यम से उनकी साहित्यिक और काव्य संबंधी सेवाओं की सराहना की गई।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ऊपरकोट जैसे प्राचीन क्षेत्र में शैक्षिक गतिविधियों को बढ़ावा देना, विद्यार्थियों के लिए अध्ययन और मार्गदर्शन के अवसर पैदा करना तथा उर्दू भाषा और साहित्य की परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना था। प्रतिभागियों ने उम्मीद जताई कि अली रज़ा खान स्टडी सेंटर क्षेत्र के विद्यार्थियों के शैक्षिक मार्गदर्शन और उनके बेहतर भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उल्लेखनीय है कि कार्यक्रम में इंजीनियर फिरोज अहमद, डॉ. आरिफ अली खान, मुहम्मद कमर आलम, इब्तिसाम अहमद, मुकर्रम अली सिद्दीकी, डॉ. शाहिद अली, मुतीउल गफ्फार, शफी अहमद खान, दिलशाद अहमद, जीशान अहमद, मजाहिर नईम, मुहम्मद मुजफ्फर, जियाउल हक, फरहान मुहम्मद खान, मुफ्ती मुहम्मद राशिद, मुजीबुर्रहमान, असद यार खान, डॉ. कुंवर आरिफ अली खान, मौलाना मुजीब, इफ्तिखार आलम, डॉ. अफजाल अहमद, नजर अली, डॉ. शाहिद सिद्दीकी, चौधरी रब्बानी, इनजार साबरी, एम. खुर्शीद खान, इमरान अंसारी, डॉ. रेहान अख्तर कासमी, आतिफ जमान खान, हाफिज साबिर, परवेज अहमद, हाजी मुहम्मद सुफियान, इरशाद फरीदी, डॉ. उबैद इकबाल आसिम, गयासुद्दीन और डॉ. मुदस्सिर अली सहित अनेक गणमान्य लोग मौजूद रहे।
