90 फुट ऊंचे मेघनाद के पुतले का आतिशी धमाकों के बीच दहन, सुलोचना के विलाप ने दर्शकों की आंखें कीं नम
गुलाब-कमल के फूलों से लेकर आकाशी झरनों तक सजी आतिशबाजी, मंगलवारी को विजयादशमी पर होगा 120 फुट ऊंचे रावण का दहन
आगरा। श्री रामलीला कमेटी द्वारा आयोजित उत्तर भारत की प्रमुख श्रीरामलीला में मंगलवार को मेघनाद वध की लीला का रोमांचक मंचन किया गया। आगरा किला के सामने स्थित रामलीला मैदान में हजारों दर्शक इस महासंग्राम के साक्षी बने। एक ओर प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण जी का रथ था तो दूसरी ओर मेघनाद का रथ। दोनों ओर से तीरों की बौछार, ढोल-ताशों की गूंज और रणभूमि में घूमते रथों ने युद्ध के दृश्य को जीवंत कर दिया। अंततः भगवान श्रीराम का स्मरण कर लक्ष्मण जी ने मेघनाद पर प्रहार किया और उसका अंत हो गया। मेघनाद का शीश रामदल के सामने जा गिरा। इसके बाद सुलोचना के विलाप ने दर्शकों को भावुक कर दिया। वहीं 90 फुट ऊंचे मेघनाद के पुतले का आतिशी धमाकों के बीच दहन किया गया।
दशानन के दरबार में गूंजा कुंभकर्ण वध का समाचार
लीला का आरंभ रावण के दरबार में कुंभकर्ण के वध का समाचार पहुंचने से हुआ। अपने भाई की मृत्यु का समाचार सुनकर दशानन व्यथित हो उठा। इसके बाद उसने अपने पराक्रमी पुत्र मेघनाद को युद्धभूमि में जाने का आदेश दिया। पिता की आज्ञा पाकर मेघनाद युद्ध के लिए निकल पड़ा। मंचीय लीला के बाद युद्ध का दृश्य रामलीला मैदान में साकार हुआ।
रथों की टक्कर, तीरों की बौछार और ढोल-ताशों के बीच महासंग्राम
मैदान में एक ओर प्रभु श्रीराम और लक्ष्मण जी का रथ था तो दूसरी ओर मेघनाद का रथ। दोनों योद्धा एक-दूसरे पर तीरों से प्रहार करने लगे। रामदल और रावण दल के सैनिक भी आमने-सामने आ गए। रथ मैदान में चक्कर लगाते हुए आगे बढ़ते रहे और दर्शक युद्ध के हर दृश्य को उत्सुकता से देखते रहे। कुछ ही देर में दोनों सेनाएं मध्यवर्ती चबूतरे पर पहुंचीं, जहां ढोल-ताशों की गूंज के बीच महासंग्राम छिड़ गया।
युद्ध में मेघनाद और लक्ष्मण जी के बीच प्रहारों का सिलसिला चलता रहा। अंततः लक्ष्मण जी ने प्रभु श्रीराम का स्मरण कर मेघनाद पर निर्णायक प्रहार किया। मेघनाद का शरीर धराशायी हो गया और उसका शीश रामदल के सामने जा गिरा। मेघनाद के वध के साथ ही मैदान जय श्रीराम और जय लक्ष्मण के जयघोषों से गूंज उठा। बैंड-बाजों ने विजय की धुन बजाई और आतिशी धमाकों ने वातावरण को गुंजायमान कर दिया।
सुलोचना के विलाप ने दर्शकों को किया भावुक
मेघनाद का शीश रामदल के सामने गिरने के बाद सुलोचना श्रीराम के पास पहुंची और अपने पति का शीश लेकर विलाप करने लगी। पति के वियोग में सुलोचना का करुण क्रंदन देखकर दर्शकों के नेत्र सजल हो गए। युद्ध के रोमांच के बाद इस मार्मिक प्रसंग ने रामलीला मैदान में भावनाओं का ऐसा वातावरण बनाया कि दर्शक कुछ पल के लिए भावविभोर हो उठे।
90 फुट ऊंचे मेघनाद के पुतले का हुआ दहन
मेघनाद वध के बाद रामलीला मैदान में स्थापित लगभग 90 फुट ऊंचे मेघनाद के विशाल पुतले का दहन किया गया। पुतले में लगी आतिशबाजी एक के बाद एक फूटने लगी और कुछ ही देर में विशाल पुतला जलकर राख हो गया। आतिशी धमाकों के बीच दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए।
गुलाब-कमल के फूलों और आकाशी झरनों ने बांधा समां
पुतला दहन से पूर्व रामलीला मैदान में आकर्षक आतिशबाजी का आयोजन किया गया। आतिशबाजी के माध्यम से गुलाब का फूल, कमल का फूल और आकाशी झरनों के मनोहारी दृश्य प्रस्तुत किए गए। आतिशबाजी में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के युद्ध के दृश्य भी प्रदर्शित किए गए। रंग-बिरंगी रोशनी से आसमान जगमगा उठा और दर्शकों ने तालियों के साथ आतिशबाजी का आनंद लिया।
युद्ध का संचालन
रामलीला मैदान में युद्ध का संचालन मुकेश जौहरी, प्रकाश चंद, प्रवीण स्वरूप, आनंद मंगल, अंजुल बंसल, मनोज अग्रवाल, रामांशु शर्मा, आयुष अग्रवाल और राम राहुल शर्मा ने किया।
मंगलवार को विजयादशमी पर होगा रावण वध, 120 फुट ऊंचे पुतले का दहन
श्रीरामलीला कमेटी के अध्यक्ष एवं विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल और महामंत्री राजीव अग्रवाल ने बताया कि विजयादशमी के पावन पर्व पर मंगलवार को शाम सात बजे से राम और रावण के बीच युद्ध की लीला का मंचन किया जाएगा। इसके बाद रामलीला मैदान में भव्य आतिशबाजी होगी। आतिशबाजी का मुकाबला सुरील के अजय और पीलीभीत के शमशाद के मध्य होगा, जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहेगा। धरती पर आतिशी झरनों के साथ आकाश को रोशन करने वाले धमाके आकर्षक दृश्य प्रस्तुत करेंगे।
रामलीला कमेटी के मीडिया प्रभारी राहुल गौतम ने बताया कि विजयादशमी पर दशानन के लगभग 120 फुट ऊंचे पुतले का दहन किया जाएगा। पुतले की नाभि से अमृत की वर्षा और दशानन की चमचमाती चंद्रहास का दृश्य भी आकर्षण का केंद्र रहेगा।
ये रहे उपस्थित
इस अवसर पर पूर्व मंत्री चौधरी उदयभान सिंह, रामलीला कमेटी के अध्यक्ष विधायक पुरुषोत्तम खंडेलवाल, महामंत्री राजीव अग्रवाल, ताराचंद, भगवान दास बंसल, विजय प्रकाश गोयल, मुकेश जौहरी, आयुष, विनोद जौहरी, प्रवीण गर्ग, विष्णु दयाल, प्रकाश चंद्र, संजय तिवारी, राहुल गौतम, महावीर मंगल, आदि उपस्थित रहे।
