भजनों ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर, स्वामी रामदास जी महाराज ने बताया पर्व का आध्यात्मिक महत्व
2151 कुंडीय महामृत्युंजय पीताम्बरा महायज्ञ को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह
आगरा। शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर जेसीबी चौराहा, शास्त्रीपुरम में मृत्युंजय मां पीताम्बरा परिवार संस्था की ओर से आयोजित भक्तिमय कार्यक्रम में भजनों की स्वर लहरियों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। माता पीताम्बरा के गुणगान और जयकारों के बीच आगामी 2151 कुंडीय महामृत्युंजय पीताम्बरा महायज्ञ की सफलता, जनकल्याण और विश्व शांति की मंगलकामना की गई। यज्ञधीश स्वामी रामदास जी महाराज के सानिध्य में होने जा रहे धार्मिक आयोजन को लेकर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।
यज्ञाधीश स्वामी रामदास जी महाराज ने शरद पूर्णिमा का महत्व बताते हुए कहा कि सनातन धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष आध्यात्मिक महत्व है। मान्यता है कि इस पावन रात्रि में चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ अमृतमयी शीतलता बिखेरता है। यह पर्व साधना, भक्ति, आराधना और आत्मिक शुद्धि का संदेश देता है। शरद पूर्णिमा पर भगवान श्रीकृष्ण ने महारास रचाकर प्रेम, भक्ति और समर्पण की महिमा का प्रतिपादन किया था। इस पावन अवसर पर की गई पूजा-अर्चना और प्रभु का स्मरण मनुष्य के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और आध्यात्मिक चेतना का संचार करता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से धर्म, सेवा और परोपकार के मार्ग पर चलने तथा जनकल्याण के कार्यों में सहभागी बनने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में सुमित चतुर्वेदी, आचार्य निशांत, आचार्य अमित एवं आचार्य अनूप ने मधुर भजनों की प्रस्तुतियां देकर वातावरण को भक्तिरस से सराबोर कर दिया। भजनों पर श्रद्धालु भावविभोर होकर माता की भक्ति में लीन नजर आए। माता के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा और उपस्थित श्रद्धालुओं ने महायज्ञ की सफलता के लिए प्रार्थना की।
इस अवसर पर अरविंद गुप्ता, टीपी सिंह, गोपाल सिकरवार, मुकेश अग्रवाल, रामकुमार शर्मा, संतोष पांडेय, सीमा चौहान, सीमा चतुर्वेदी आदि श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने धार्मिक आयोजन में सहभागिता कर महायज्ञ के प्रति अपनी आस्था और उत्साह व्यक्त किया।
आयोजकों ने बताया कि 2151 कुंडीय महामृत्युंजय पीताम्बरा महायज्ञ का उद्देश्य धार्मिक आस्था को सुदृढ़ करने के साथ सामाजिक समरसता, जनकल्याण, सेवा और आध्यात्मिक चेतना का प्रसार करना है। महायज्ञ के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को धर्म एवं लोककल्याण के कार्यों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
