“मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना होगा” — AICC पर्यवेक्षक आबिद कश्मीरी
मथुरा। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के मथुरा पर्यवेक्षक आबिद कश्मीरी ने ‘वोट बचाओ–देश बचाओ’ अभियान के तहत मतदाता सूची में पारदर्शिता, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और चुनावी व्यवस्था की जवाबदेही का मुद्दा उठाया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि प्रत्येक पात्र भारतीय नागरिक के संवैधानिक मताधिकार की रक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए।
मथुरा में आयोजित प्रेस वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) तथा वीवीपैट की विश्वसनीयता और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े सवालों का जवाब तथ्यों, सत्यापन योग्य आंकड़ों और संस्थागत जवाबदेही के आधार पर दिया जाना चाहिए।
प्रेस वार्ता में जिला एवं शहर कांग्रेस के पदाधिकारियों सहित पार्टी के अन्य नेताओं ने भी भाग लिया। उपलब्ध प्रेस विज्ञप्ति में उपस्थित नेताओं के कुछ नाम स्पष्ट नहीं हैं।
डेटा और सार्वजनिक साक्ष्यों के आधार पर उठाए सवाल
आबिद कश्मीरी ने राहुल गांधी द्वारा प्रस्तुत चुनावी आंकड़ों और पिछले चुनावों के तुलनात्मक विश्लेषण का उल्लेख किया। उन्होंने महाराष्ट्र में वर्ष 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच मतदाता संख्या में कथित वृद्धि को लेकर सवाल उठाए।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, कांग्रेस ने दावा किया कि महाराष्ट्र में 2024 के दौरान मतदाता सूची में लगभग 39 लाख नए मतदाता जुड़े, जबकि पिछले पांच वर्षों में लगभग 32 लाख मतदाता जुड़े थे। पार्टी ने इन आंकड़ों की पारदर्शी जांच और मशीन से पढ़े जा सकने वाले डिजिटल डेटा को सार्वजनिक करने की मांग की।
उन्होंने राहुल गांधी द्वारा 7 अगस्त 2025 को बेंगलुरु सेंट्रल के महादेवपुरा क्षेत्र में प्रस्तुत विश्लेषण का भी हवाला दिया। इस विश्लेषण में कांग्रेस की ओर से लगभग 1,00,250 मतदाताओं के प्रभावित होने का दावा किया गया था। पार्टी ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की।
हरियाणा और कर्नाटक में मतदाता सूची पर सवाल
कांग्रेस ने हरियाणा और कर्नाटक में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने की कथित घटनाओं का उल्लेख करते हुए निर्वाचन आयोग से स्पष्ट जानकारी मांगी। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में किए गए बदलावों की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और राजनीतिक दलों को जांच के लिए उपयोगी डिजिटल आंकड़े उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
चुनाव आयोग की जवाबदेही का मुद्दा
आबिद कश्मीरी ने सितंबर 2026 की मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए चुनाव आयोग के भीतर कथित आपत्तियों और असहमतियों से जुड़े मामलों में सार्वजनिक जवाबदेही की मांग की। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया पर नागरिकों का विश्वास बनाए रखने के लिए संबंधित तथ्यों और प्रक्रियाओं को स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
SIR प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकार
कांग्रेस ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर चिंता जताई। प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया कि 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं।
पार्टी ने मांग की कि मतदाता सूची से हटाए गए नामों के संबंध में स्पष्ट आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं। साथ ही, किसी भी पात्र नागरिक का नाम प्रशासनिक जटिलता या तकनीकी त्रुटि के कारण मतदाता सूची से नहीं हटना चाहिए।
कांग्रेस की आठ प्रमुख मांगें
प्रेस वार्ता में आबिद कश्मीरी ने पार्टी की ओर से निम्नलिखित मांगें रखीं:
- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तत्काल इस्तीफा दें।
- SIR प्रक्रिया को तत्काल स्थगित किया जाए।
- हटाए गए बताए जा रहे 13.3 करोड़ नामों की समीक्षा कर पात्र मतदाताओं के नाम बहाल किए जाएं।
- मतदाता सूची की विसंगतियों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- मतदाता सूची में किए गए सभी प्रमुख बदलावों का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाए।
- राजनीतिक दलों को डिजिटल और उपयोग योग्य प्रारूप में डेटा उपलब्ध कराया जाए।
- किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे स्पष्ट लिखित सूचना दी जाए।
- प्रभावित नागरिकों को नाम जुड़वाने के लिए निष्पक्ष अपील और पर्याप्त अवसर दिया जाए।
‘वोट की रक्षा, लोकतंत्र की रक्षा’
अपने संबोधन में आबिद कश्मीरी ने कहा कि मतदाता सूची में प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम सुनिश्चित करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी आवश्यकता है। उन्होंने ‘वोट बचाओ–देश बचाओ’ अभियान के माध्यम से मताधिकार की सुरक्षा, पारदर्शिता और चुनावी प्रक्रिया में जवाबदेही की मांग उठाई।
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