इमरान मसूद ने पोस्टरों से किया किनारा, भाजपा पर लगाया गठबंधन में फूट डालने की कोशिश का आरोप; सीट बंटवारे पर जल्द सहमति बनने का जताया भरोसा
लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। दोनों दलों के नेता भले ही गठबंधन की मजबूती का दावा कर रहे हों, लेकिन सीटों की संख्या को लेकर सामने आ रहे दावों ने राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे दी है। इसी बीच लखनऊ में ‘200 सीट हक है हमारा’ लिखे पोस्टर दिखाई देने के बाद गठबंधन की रणनीति को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
कांग्रेस की 200 सीटों की मांग, सपा 60-70 सीटें देने के पक्ष में!
मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि कांग्रेस ने आगामी विधानसभा चुनाव में 200 सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग की है। वहीं, समाजवादी पार्टी कांग्रेस को 60 से 70 सीटें देने पर विचार कर सकती है। हालांकि, सीटों की संख्या को लेकर सपा की ओर से किसी आधिकारिक प्रस्ताव की पुष्टि नहीं हुई है।
सीटों की मांग और संभावित पेशकश के बीच बड़ा अंतर होने के कारण दोनों दलों के बीच बातचीत को लेकर राजनीतिक अटकलें तेज हो गई हैं। कांग्रेस जहां अपने पिछले लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन के आधार पर अधिक सीटें चाहती है, वहीं सपा अपनी चुनावी स्थिति को देखते हुए अधिक सीटों पर उम्मीदवार उतारने की रणनीति अपना सकती है।
‘200 सीट हक है हमारा’ पोस्टर पर इमरान मसूद का बयान
लखनऊ में रविवार को सामने आए पोस्टरों पर सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इन पोस्टरों को कांग्रेस की ओर से लगाए जाने से इनकार किया और इसके पीछे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का हाथ होने का आरोप लगाया।
सोमवार को समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में मसूद ने कहा कि भाजपा गठबंधन से घबराई हुई है और सहयोगी दलों के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस और सपा का गठबंधन मजबूत है तथा दोनों दल पूरी ताकत के साथ विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।
मसूद ने सीट बंटवारे को बड़ा मुद्दा मानने से इनकार करते हुए भरोसा जताया कि बातचीत के जरिए इसका समाधान निकाल लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जब दिल में जगह होती है, तो बाकी चीजें भी ठीक हो जाती हैं।
कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के प्रदर्शन को बनाया आधार
कांग्रेस की ओर से 200 विधानसभा सीटों की मांग किए जाने के पीछे 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में पार्टी का प्रदर्शन प्रमुख आधार बताया जा रहा है। कांग्रेस ने उस चुनाव में राज्य की छह लोकसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी।
रिपोर्टों के अनुसार, कांग्रेस ने विधानसभा क्षेत्रों में अपने प्रदर्शन और संगठनात्मक स्थिति सहित चार श्रेणियों के आधार पर सीटों की पहचान की है। पार्टी चाहती है कि सीटों पर जल्द सहमति बने, ताकि संभावित उम्मीदवारों को चुनावी तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके। सूत्रों के हवाले से 15 नवंबर तक सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय होने की उम्मीद भी जताई गई है।
पिछले विधानसभा चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश में पिछले दो विधानसभा चुनावों के आंकड़े कांग्रेस की कमजोर स्थिति को भी दर्शाते हैं।
- 2017 विधानसभा चुनाव: कांग्रेस ने 114 सीटों पर चुनाव लड़ा और सात सीटों पर जीत हासिल की।
- 2022 विधानसभा चुनाव: कांग्रेस ने 399 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन केवल दो सीटों पर जीत दर्ज कर सकी।
इन चुनावी नतीजों को देखते हुए समाजवादी पार्टी सीटों के बंटवारे में अपने लिए बड़ा हिस्सा सुरक्षित रखना चाह सकती है। दूसरी ओर, कांग्रेस लोकसभा चुनाव में मिले समर्थन और अपने संगठनात्मक विस्तार को आधार बनाकर अधिक सीटों के लिए बातचीत कर सकती है।
गठबंधन की एकजुटता के सामने सीटों का सवाल
उत्तर प्रदेश में भाजपा को चुनौती देने के लिए सपा और कांग्रेस का गठबंधन विपक्षी राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में सीट बंटवारे पर दोनों दलों के बीच सहमति बनना गठबंधन की चुनावी रणनीति के लिए अहम होगा।
फिलहाल, 200 सीटों की मांग और 60-70 सीटों की संभावित पेशकश को लेकर सामने आए दावे आधिकारिक समझौते का रूप नहीं ले पाए हैं। अब सबकी निगाहें दोनों दलों के बीच होने वाली बातचीत और अंतिम सीट बंटवारे पर टिकी हैं।
साभार: टाइम्स ऑफ ताज
डिस्क्लेमर: इस रिपोर्ट में सीट बंटवारे से संबंधित दावों को मीडिया रिपोर्टों और सूत्रों के हवाले से प्रस्तुत किया गया है। अंतिम स्थिति संबंधित राजनीतिक दलों की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।
