कार्यक्रम में विभिन्न ब्राह्मण संगठनों ने लिया हिस्सा, सामाजिक मुद्दों पर संवाद और संकल्प का आह्वान
आगरा। महादेवी सेवा सदन, श्याम नगर, रामबाग में रविवार को ब्राह्मण समन्वय संवाद–2 कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ब्राह्मण समाज से जुड़े संगठनों और लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज से जुड़े विभिन्न विषयों पर चिंतन, संवाद और भविष्य की दिशा को लेकर संकल्प लेना रहा।
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान परशुराम के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। अतिथियों का स्वागत कार्यक्रम के संयोजक सुरेश शर्मा और अध्यक्ष अजय शर्मा ने किया। कार्यक्रम का संचालन अजय शर्मा ने किया।
कार्यक्रम में वक्ताओं के रूप में महेश शर्मा, लेखिका भावना वरदान शर्मा, राजेंद्र शास्त्री, सोनम शर्मा और राजकुमार शर्मा ने अपने विचार रखे।
ब्राह्मण आयोग के गठन की मांग उठी
लेखिका भावना वरदान शर्मा ने अपने संबोधन में ब्राह्मण समाज से जुड़े राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज की अपनी कोई राजनीतिक पार्टी नहीं है और न ही ब्राह्मणों के लिए कोई संवैधानिक आयोग है। उन्होंने ब्राह्मण आयोग के गठन और समाज के हितों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की।
उन्होंने ब्राह्मण संरक्षण एक्ट, सवर्ण/ब्राह्मण आयोग के गठन, ब्राह्मण विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति, मंदिरों में विप्र पुजारियों के लिए भत्ता, UGC से संबंधित नीतियों की समीक्षा, EWS के सरलीकरण और गौहत्या प्रतिबंध कानून सहित विभिन्न मांगों का उल्लेख किया।
भावना वरदान शर्मा ने मंदिरों की संपत्ति को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने तथा ब्राह्मण समाज के लिए विशेष संवैधानिक संरक्षण की मांग भी उठाई। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में ब्राह्मण समाज की समस्याओं को लेकर चिंतित है तो आयोग के गठन की दिशा में कदम उठाने चाहिए।
‘किसी एक व्यक्ति का नहीं, पूरे समाज का कार्यक्रम’
कार्यक्रम के संयोजक सुरेश शर्मा ने कहा कि ब्राह्मण समन्वय संवाद किसी एक व्यक्ति का कार्यक्रम नहीं, बल्कि पूरे समाज का मंच है। उन्होंने कहा कि समाज में कई बार लोग अपने ही लोगों को आगे बढ़ने से रोकते हैं, जबकि किसी एक व्यक्ति की प्रगति दूसरे की हार नहीं होती।
उन्होंने कहा कि संवाद में न कोई बड़ा है और न छोटा। जो व्यक्ति समाज के लिए सोचता है, उसकी बात सुनी जानी चाहिए और जो समाज के लिए काम करना चाहता है, उसे अवसर मिलना चाहिए।
सुरेश शर्मा ने कहा कि उद्देश्य किसी एक व्यक्ति को नेता बनाना नहीं, बल्कि समाज के हर योग्य व्यक्ति को नेतृत्व का अवसर देना है। उन्होंने लोगों से केवल भीड़ का हिस्सा बनने के बजाय अपनी बात रखने, दूसरों की बात सुनने और समाज के लिए कार्य करने का संकल्प लेने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति अपने साथ दस लोगों को जोड़ता है, वह नेता हो सकता है, लेकिन जो दस लोगों को आगे बढ़ाता है, वही समाज का सच्चा नेतृत्व करता है। उन्होंने समाज को संगठित करने और भविष्य के लिए सामूहिक रूप से काम करने का आह्वान किया।
कई प्रमुख लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में मधु शर्मा, शैलेंद्र शर्मा, आरपी शर्मा, राजबहादुर शर्मा, कवि रामवीर शर्मा सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने सामाजिक एकता, संगठन की मजबूती और समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर आपसी संवाद को आगे बढ़ाने पर जोर दिया।
