रसमई कीर्तन और कथा विचार से संगत हुई निहाल
देशभर के विख्यात रागी जत्थे व प्रचारक हुए शामिल
आगरा। गुरुद्वारा गुरु का ताल में आयोजित 39 वे सालाना गुरमत समागम के दूसरे दिन कीर्तन और कथा विचार की अमृत मई धारा बही। देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रख्यात रागी जत्थों, प्रचार को और सिंह साहिबान ने संगत को गुरु चरणों से जोड़ा और नई पीढ़ी को सिक्खी के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया। दूसरे दिन का पहला दीवान भाई नंदलाल दीवान हॉल में सुबह 8:00 बजे शुरू हुआ। कीर्तन के साथ गुरु ग्रंथ साहिब जी की सवारी दीवान हॉल में पहुंची और गुरु महाराज के प्रकाश के साथ कीर्तन समागम की शुरुआत हुई । सबसे पहले गुरुद्वारा गुरु का ताल में संचालित गुरमत विद्यालय के बच्चों ने कीर्तन किया ।इसके बाद गुरुद्वारा गुरु का ताल के हजूरी रागी जत्थों ने अपनी हाजिरी भरी। कीर्तन समागम में मुख्य रूप से आए रागी भाई हरजोत सिंह जख्मी रागी भाई तरनवीर सिंह रब्बी ने इलाही वाणी का कीर्तन करते हुए संगत को निहाल किया। वहीं पंजाब से बीबी दिलेर कौर खालसा के दाढ़ी जत्थे ने वीर रस में गुरुओं की शौर्य गाथाओं को सुनाते हुए पूरे माहौल में एक जोश सा भर दिया।
इसके अलावा गुरुद्वारा बगला साहिब नई दिल्ली के हेड ग्रंथि ज्ञानी रणजीत सिंह ,गुरुद्वारा शीशगंज चांदनी चौक दिल्ली के हेड ग्रंथी ज्ञानी अंग्रेज सिंह ,दरबार साहिब अमृतसर से आए सिंह साहब निशांन सिंह और पंजाब के कथा वाचक भाई रणजीत सिंह गौहरे मस्कीन ने कथा विचार के माध्यम से नई पीढ़ी को गुरमत से जुड़ने और सिक्खी की राह पर चलते हुए गुरु मर्यादा का पालन करने की नसीहत दी।कीर्तन दरबार में सुबह से लेकर देर रात तक भारी संख्या में श्रद्धालुओं का जन सैलाब उमड़ाता नजर आया।

गुरुद्वारा गुरु का ताल के मौजूदा मुखी संत बाबा प्रीतम सिंह जी ने बताया गुरुद्वारा गुरु का ताल की सेवा संभालते हुए इसे भव्यता प्रदान करने वाले संत बाबा साधू सिंह जी मौनी व बाबा निरंजन सिंह जी की याद में इस समागम का आयोजन किया जाता हैं ।
दूसरे दीवान की आरंभता शाम 6:00 बजे रहिरास साहब के पाठ के साथ हुई।यह दीवान रात्रि 2:00 बजे तक चला ।दीवान की अंत में आनंद साहिब का पाठ हुआ ।जिसके बाद समाप्ति अरदास व हुकुमनामे के साथ हुई।
श्रद्धा के साथ किया लंगर तैयार प्रेम के साथ किया वितरित
तीन दिवसीय गुरमत समागम में धर्म लाभ कमाने के लिए प्रतिवर्ष उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर पीलीभीत के अलावा उत्तराखंड व मध्य प्रदेश से धौलपुर ,डबरा, ग्वालियर और पंजाब से भी काफी संख्या में संगत यहां पहुंचती है। जिनके रुकने से लेकर लंगर के लिए विशेष इंतजाम प्रतिवर्ष किए जाते हैं ।गुरुद्वारा में कई वर्षों से लंगर की सेवा संभाल रहे बाबा अमरीक सिंह जी ने बताया कि कीर्तन समागम के दौरान 24 घंटे लंगर व चाय की सेवा जारी रहती है। हर चार से पांच घंटे बाद अलग व्यंजनों के साथ लंगर तैयार किया जा रहा है ।उन्होंने बताया कि इस समागम में मुख्य रूप से उड़द, चने ,मूंग की दाल ,बेसन की कड़ी , आलू की सब्जी ,पूरी ,खीर और मुख्य रूप से जलेबी तैयार किए गए हैं ।लंगर पूरी श्रद्धा के साथ संगत में वितरित किया जा रहा है । जिसके लिए सितारगंज से विशेष रूप से भाई मंजसेवा समिति के 150 से अधिक सदस्य प्रतिवर्ष सेवा के लिए यहां आते हैं।
समागम के दौरान संत बाबा प्रीतम सिंह कीर्तन दरबार के साथ-साथ आने वाली संगत के रुकने और लंगर ,चाय आदि की व्यवस्थाओं को दुरुस्त बनाए रखने के लिए निरंतर पूरे परिसर का निरीक्षण भी करते रहते हैं।
3 अक्टूबर को होगा अमृत संचार
गुरुद्वारा गुरु का ताल के मीडिया प्रभारी जसबीर सिंह जस्सी ने बताया कि समागम के अंतिम दिन 3 अक्टूबर को सुबह गुरुद्वारा मंजी साहिब में अमृत संचार कराया जाएगा ।अमृत पान करने वाले श्रद्धालु सुबह केसी स्नान कर,स्वच्छ वस्त्र पहनकर गुरुद्वारा मंजी साहब में 9 बजे तक पहुंच जाए ।दिल्ली से आए पंज प्यारे यहां अमृत पान कराएंगे ।अमृत पान के लिए आने वाले सभी श्रद्धालुओं को ककार दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से ही उपलब्ध कराएं जाएंगे ।
यह रहे मौजूद
जत्थेदार बाबा पाल सिंह सितारगंज, जत्थेदार बाबा अमर सिंह बंडा शाहजहांपुर , जत्थेदार सतनाम सिंह निजामाबाद, महंत महेंद्र सिंह जी ,राजू सलूजा, श्री गुरु सिंह सभा के प्रधान कवलदीप सिंह, हेड ग्रंथी गुरुद्वारा माईथान ज्ञानी कुलविंदर सिंह, दलजीत सिंह सेतिया, उपेंद्र सिंह लवली, बॉबी वालिया, परमजीत सिंह सरना,श्याम भोजवानी , चौधरी मनजीत सिंह, महंत हरपाल सिंह जी, ग्रंथि अजायब सिंह टीटू ,ग्रंथि हरबंस सिंह ,ग्रंथी सतवीर सिंह सुशील,हरनाम सिंह, ज्ञानी केवल सिंह ,भाई जोगा सिंह प्रमुख रूप से मौजूद रहे।
