नई दिल्ली। सोने में निवेश करने वालों के लिए बाजार से बड़ी खबर है। सोने की चमक फिलहाल फीकी पड़ती दिखाई दे रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में लगातार गिरावट के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सोना 4,000 डॉलर प्रति औंस के अहम स्तर तक पहुंच जाएगा?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना घटकर करीब 4,138 डॉलर प्रति औंस पर आ गया है। वहीं भारत में सोने की कीमत करीब 1,50,250 रुपये प्रति 10 ग्राम बताई जा रही है। इस सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत में करीब 3 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है।
कमजोर अमेरिकी नौकरी के आंकड़े भी नहीं रोक पाए गिरावट
दिलचस्प बात यह है कि अमेरिका से आए कमजोर रोजगार आंकड़ों के बावजूद सोने की कीमतों को मजबूती नहीं मिल सकी।
अमेरिकी श्रम सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार सितंबर में सिर्फ 29,000 नई नौकरियां जुड़ीं। बेरोजगारी दर बढ़कर 4.2 प्रतिशत हो गई, जबकि औसत वेतन में केवल 0.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
आमतौर पर ऐसे आंकड़ों से अमेरिकी ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद बढ़ती है और इसका फायदा सोने को मिलता है। लेकिन इस बार बाजार में तस्वीर उलटी नजर आई। सोना 4,200 डॉलर के ऊपर टिक नहीं पाया और बिकवाली तेज हो गई।
अब 4,000 डॉलर पर टिकी बाजार की नजर
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले दिनों में 4,000 डॉलर प्रति औंस सोने के लिए सबसे महत्वपूर्ण स्तर बन गया है।
यदि डॉलर मजबूत बना रहता है और सोना तेजी पकड़ने में विफल रहता है तो कीमत इस स्तर को दोबारा टेस्ट कर सकती है। हालांकि, 4,000 डॉलर के आसपास खरीदारी लौटती है तो यही स्तर सोने के लिए मजबूत सपोर्ट भी बन सकता है।
यानी आने वाले दिनों में 4,000 डॉलर का स्तर सोने की अगली बड़ी दिशा तय कर सकता है।
महंगाई और फेड का फैसला बनेगा गेमचेंजर
सोने की अगली चाल पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति का बड़ा असर पड़ सकता है। कमजोर रोजगार आंकड़ों के बाद अक्टूबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना कम हुई है, लेकिन बाजार दिसंबर की संभावनाओं पर नजर बनाए हुए है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ रोजगार आंकड़े ही सोने की दिशा तय नहीं करेंगे। अमेरिकी महंगाई, बॉन्ड यील्ड, डॉलर की मजबूती, पेट्रोल की कीमत और वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी बेहद महत्वपूर्ण होंगे।
अगले हफ्ते आएंगे 4 बड़े संकेत
निवेशकों के लिए अगला सप्ताह बेहद अहम रहने वाला है। अमेरिका से चार महत्वपूर्ण आंकड़े सामने आने हैं:
सोमवार — ISM सर्विसेज PMI
बुधवार — फेडरल रिजर्व की सितंबर बैठक का विवरण
गुरुवार — साप्ताहिक बेरोजगारी दावे
शुक्रवार — मिशिगन यूनिवर्सिटी का प्रारंभिक उपभोक्ता भावना सर्वे
इन आंकड़ों से अमेरिकी अर्थव्यवस्था की स्थिति और फेड की अगली रणनीति को लेकर संकेत मिल सकते हैं।
क्या फिर शुरू होगी सोने में तेजी?
विशेषज्ञों के मुताबिक फिलहाल सोने के लिए 4,200 डॉलर तेजी की राह में महत्वपूर्ण बाधा है, जबकि 4,000 डॉलर बड़ा सपोर्ट स्तर बन चुका है।
अगर सोना 4,000 डॉलर के आसपास टिक जाता है तो यहां से दोबारा खरीदारी देखने को मिल सकती है। लेकिन अगर यह स्तर भी टूट गया तो बाजार में और गिरावट की आशंका बढ़ सकती है।
भारतीय बाजार में सोने की कीमत अंतरराष्ट्रीय भाव के अलावा रुपये की डॉलर के मुकाबले स्थिति, आयात शुल्क और घरेलू मांग से भी प्रभावित होती है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में आई हर गिरावट का भारतीय बाजार में बिल्कुल उसी अनुपात में असर होना जरूरी नहीं है।
अज़हर उमरी, वरिष्ठ पत्रकार
Times of Taj Disclaimer: सोने की कीमतें बाजार की परिस्थितियों के अनुसार बदलती रहती हैं। यह खबर केवल सूचनात्मक उद्देश्य से है और इसे निवेश सलाह न माना जाए। निवेश से पहले योग्य वित्तीय सलाहकार की राय लेना उचित है।
