वाराणसी | TIMES OF TAJ
वाराणसी में लाट भैरव की रामलीला के दौरान इस बार मस्जिद से मगरिब की अजान सुनाई नहीं दी। रामलीला की चौपाइयों और अजान के एक साथ गूंजने की परंपरा को काशी की गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल माना जाता रहा है। इस बार अजान नहीं होने से परंपरा को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
लाट भैरव मंदिर परिसर में रामलीला के विशेष प्रसंग जयन्त-नेत्रभंग का मंचन किया गया। इस दौरान चबूतरे से रामचरितमानस की चौपाइयों का पाठ हुआ, लेकिन पास की मस्जिद से अजान नहीं सुनाई दी।
स्थानीय स्तर पर प्रचलित मान्यता के अनुसार, इस आयोजन में रामलीला के पाठ के साथ मस्जिद से अजान भी दी जाती रही है। इसे दोनों समुदायों की साझा सांस्कृतिक विरासत और आपसी सौहार्द के प्रतीक के रूप में देखा जाता है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इस बार मस्जिद के मुतवल्ली और नमाजी मौके पर नहीं पहुंचे। हालांकि, अजान नहीं होने की वजह स्पष्ट नहीं हो सकी है। इस संबंध में संबंधित पक्षों का आधिकारिक बयान भी सामने आना बाकी है।
काशी की सांस्कृतिक पहचान में धार्मिक परंपराओं के साथ साझा विरासत का भी विशेष स्थान रहा है। ऐसे में लाट भैरव की रामलीला के दौरान अजान नहीं होने की घटना ने वर्षों से चली आ रही परंपरा को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
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