छात्रावासों में अग्नि सुरक्षा, स्वच्छता और सुरक्षित पेयजल की सुविधाओं पर उठे सवाल; अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से जवाब तलब
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सरकार से अनुदान प्राप्त 556 मदरसों के छात्रावासों में सुरक्षा मानकों के कथित उल्लंघन को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग से मामले की जांच कर रिपोर्ट और की गई कार्रवाई का ब्योरा मांगा है। इसके लिए 8 नवंबर तक की समयसीमा निर्धारित की गई है।
निर्धारित समय के भीतर जवाब नहीं देने पर आयोग ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है।
छात्रावासों की अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था पर शिकायत
बाराबंकी निवासी तलहा अंसारी ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि सरकार से अनुदान प्राप्त 556 मदरसों में से अधिकांश के प्रबंधकों ने छात्रावास संचालन के लिए जरूरी सरकारी अनुमति और अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) प्राप्त नहीं किए हैं।
शिकायत में छात्रावासों में अग्निशमन उपकरणों और जरूरी सुरक्षा संसाधनों की कमी का मुद्दा भी उठाया गया। इसके अलावा स्वास्थ्य एवं स्वच्छता संबंधी प्रमाणपत्रों, साफ-सफाई और सुरक्षित पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता पर भी सवाल खड़े किए गए।
अधिकारियों से जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश
शिकायत का संज्ञान लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ के माध्यम से अल्पसंख्यक कल्याण एवं वक्फ विभाग के अपर मुख्य सचिव और विभाग के निदेशक को मामले की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था।
अब आयोग ने 8 नवंबर तक जांच रिपोर्ट और कार्रवाई का विवरण उपलब्ध कराने को कहा है। मामले में विभाग की जांच और आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
Times of Taj की ओर से: यह समाचार उपलब्ध कराई गई जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और विभाग की अंतिम जांच रिपोर्ट के निष्कर्ष अलग हो सकते हैं।
