शादी का सही समय उम्र तय नहीं करती, बल्कि सही इंसान, सही सोच और आपसी समझ तय करती है।
शादी देर से होने से या शादी न होने से इंसान मर नहीं जाता, लेकिन गलत जगह शादी हो जाने से इंसान जीते जी जरूर मर जाता है।
यह बात सुनने में भले ही कड़वी लगे, लेकिन जिंदगी की एक बड़ी सच्चाई है। हमारे समाज में शादी को लेकर इतनी जल्दी और इतना दबाव बनाया जाता है कि कई बार इंसान अपनी खुशी, अपनी पसंद और अपने भविष्य को पीछे छोड़ देता है। उम्र बढ़ने का डर, लोगों की बातें, रिश्तेदारों के सवाल और समाज की सोच इंसान को ऐसे फैसले लेने पर मजबूर कर देते हैं, जिनका दर्द उसे जिंदगी भर सहना पड़ सकता है।
शादी सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं, बल्कि दो जिंदगी, दो सोच और दो परिवारों के भविष्य का रिश्ता है। इस रिश्ते में प्यार, सम्मान, भरोसा और एक-दूसरे को समझने की भावना न हो, तो साथ रहते हुए भी इंसान खुद को अकेला महसूस कर सकता है।
जिस घर में हर बात पर अपमान हो, जहां भावनाओं की कद्र न हो, जहां अपनी बात कहने की आजादी न हो और जहां इंसान को हर दिन अपने अस्तित्व के लिए लड़ना पड़े, वहां शादी का रिश्ता बोझ बन जाता है। बाहर से सब कुछ सामान्य दिखाई दे सकता है, लेकिन भीतर ही भीतर एक इंसान टूट रहा होता है।
इसके विपरीत, देर से शादी करने वाला इंसान भी खुशहाल जिंदगी जी सकता है। शादी न करने वाला व्यक्ति भी सम्मान, सुकून और उद्देश्य के साथ अपना जीवन बिता सकता है। जिंदगी की खूबसूरती केवल शादी में नहीं, बल्कि मानसिक शांति, आत्मसम्मान और अपनेपन में भी होती है।
इसलिए शादी के फैसले में जल्दबाजी नहीं, समझदारी जरूरी है। केवल उम्र निकलने के डर से किसी को अपना जीवनसाथी न बनाएं। यह न देखें कि समाज क्या कहेगा, बल्कि यह समझें कि जिसके साथ आप जिंदगी बिताने जा रहे हैं, क्या वह आपकी इज्जत करेगा? क्या आपकी बात सुनेगा? क्या मुश्किल वक्त में आपका साथ देगा? क्या उसके साथ आप अपने असली व्यक्तित्व के साथ जी सकेंगे?
याद रखिए, अकेले रह जाना जिंदगी की हार नहीं है और शादी हो जाना जिंदगी की जीत नहीं है। असली जीत उस रिश्ते में है, जहां आपको अपना सम्मान बचाने के लिए रोज संघर्ष न करना पड़े, जहां प्यार के साथ भरोसा हो और जहां घर लौटने पर डर नहीं, सुकून महसूस हो।
शादी की सही उम्र से ज्यादा जरूरी है शादी के लिए सही इंसान का मिलना। क्योंकि गलत फैसले को समाज के सामने निभाना आसान हो सकता है, लेकिन उसका दर्द हर दिन अपने भीतर लेकर जीना बेहद मुश्किल होता है।
इसलिए शादी देर से हो तो परेशान मत होइए, लेकिन सिर्फ जल्दी शादी करने के लिए गलत इंसान को अपनी जिंदगी का हिस्सा मत बनाइए। जिंदगी बहुत कीमती है। इसे समाज को जवाब देने में नहीं, बल्कि खुशी, सम्मान और सुकून के साथ जीने में लगाइए।
— एक विचार, जो हर उस इंसान को समझना चाहिए जो शादी के सामाजिक दबाव में कोई बड़ा फैसला लेने जा रहा है।
लेखक- अज़हर उमरी
वरिष्ठ पत्रकार एवं सामाजिक चिंतक
