लखनऊ: सहायता प्राप्त और वित्त विहीन विद्यालयों के कर्मचारियों व आश्रितों को सरकारी और संबद्ध निजी अस्पतालों में मिलेगा लाभ, सरकार खर्च करेगी 51.11 करोड़ रुपये सालाना
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने विद्यालयों में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले पात्र कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई। इस फैसले से कुल 1,70,366 कर्मचारियों को लाभ मिलेगा।
बेसिक शिक्षा विभाग के 1,22,304 कर्मचारियों को लाभ
बेसिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत बेसिक शिक्षा परिषद, अशासकीय सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूल, वित्त विहीन विद्यालयों और समग्र शिक्षा परियोजना में कार्यरत कर्मचारियों को योजना में शामिल किया गया है। इनके लिए सरकार लगभग 36.69 करोड़ रुपये सालाना खर्च करेगी।
माध्यमिक और संस्कृत विद्यालयों के कर्मचारी भी शामिल
माध्यमिक शिक्षा विभाग के सहायता प्राप्त एवं वित्त विहीन माध्यमिक विद्यालयों, संस्कृत विद्यालयों और संस्कृत महाविद्यालयों में कार्यरत 48,062 कर्मचारियों को भी कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। इस पर करीब 14.42 करोड़ रुपये सालाना खर्च होने का अनुमान है।
सरकारी और संबद्ध निजी अस्पतालों में होगा इलाज
योजना के तहत प्रति कर्मचारी तीन हजार रुपये वार्षिक प्रीमियम सरकार वहन करेगी। इस प्रकार दोनों विभागों के लिए कुल वार्षिक वित्तीय भार लगभग 51.11 करोड़ रुपये होगा।
योजना का संचालन स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) के माध्यम से किया जाएगा। पात्र कर्मचारियों और उनके आश्रितों को सरकारी अस्पतालों तथा साचीज से संबद्ध निजी अस्पतालों में भर्ती होकर इलाज कराने की सुविधा मिलेगी। उपचार की दरें आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के निर्धारित मानकों के अनुसार होंगी।
यह फैसला उन कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण राहत है, जिन्हें गंभीर बीमारी या अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में इलाज के खर्च की चिंता करनी पड़ती है।
TIMES OF TAJ | डिस्क्लेमर: समाचार उपलब्ध जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। योजना की विस्तृत पात्रता और लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया के लिए संबंधित विभाग के आधिकारिक दिशा-निर्देश देखें।
