संवाद। अज़मत अली
सफेद कबूतर उड़ाकर दिया शांति और भाईचारे का दिया संदेश
शहनाई की मधुर स्वर-लहरियों, पीएसी बैंड की धुनों और रंगारंग प्रस्तुतियों ने बांधा समां
बाराबंकी। सूफी संत हजरत हाजी वारिस अली शाह की रूहानी सरजमीं मंगलवार को शहनाई की मधुर स्वर-लहरियों, पीएसी बैंड की गूंजती धुनों और सांस्कृतिक उल्लास से सराबोर हो उठी। आस्था, अध्यात्म और गंगा-जमुनी तहजीब की सदियों पुरानी विरासत को संजोए विश्वप्रसिद्ध ऐतिहासिक देवा मेले का भव्य शुभारंभ शेख मोहम्मद हसन गेट से हुआ। जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह की धर्मपत्नी आईएएस रिया केजरीवाल ने फीता काटकर मेले का विधिवत उद्घाटन किया। इसके उपरांत सफेद कबूतर उड़ाकर अमन, शांति, सद्भाव और भाईचारे का संदेश दिया। इस अवसर पर सीडीओ पंकज वर्मा, एडीएम निरंकार सिंह, जॉइंट मजिस्ट्रेट गुंजिता अग्रवाल , मेला कमेटी के सम्मानित सदस्य गण सहित अन्य अधिकारी एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।
शुभारंभ के साथ ही मेले का वातावरण उत्सवी उमंग से भर उठा। रंग-बिरंगी दुकानों, आकर्षक झूलों और मनोरंजन के विविध साधनों ने लोगों को आकर्षित किया, वहीं बच्चों की खिलखिलाहट और जायरीन की चहल-पहल से पूरा परिसर जीवंत हो उठा। पशु बाजार में भी रौनक दिखाई दी। मेले की सतरंगी छटा और पारंपरिक साज-सज्जा के बीच पहले दिन से ही लोगों की आवाजाही ने आयोजन की भव्यता को चार चांद लगा दिए।

कौमी एकता और गंगा-जमुनी तहजीब की अनुपम मिसाल
देवा मेला महज मनोरंजन, खरीदारी और मेल-मिलाप का आयोजन नहीं, बल्कि साझा संस्कृति, मानवीय संवेदना और सामाजिक समरसता की ऐसी गौरवशाली परंपरा है, जो धर्मों और समुदायों की सीमाओं से ऊपर उठकर इंसानियत का संदेश देती है। हजरत हाजी वारिस अली शाह की प्रेम, करुणा और सर्वधर्म समभाव से जुड़ी शिक्षाओं की छांव में यह मेला आपसी मोहब्बत, सहिष्णुता और भाईचारे की ज्योति प्रज्वलित करता आ रहा है।
उद्घाटन के अवसर पर सफेद कबूतर उड़ाकर दिया गया शांति का संदेश इसी आध्यात्मिक विरासत का प्रतीक बना। विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोगों की सहभागिता देवा की उस विशिष्ट पहचान को साकार करती है, जहां विविधताओं के बीच एकता, आस्था के साथ उदारता और परंपरा के साथ सद्भाव का सुंदर समन्वय दिखाई देता है। यही कारण है कि देवा मेला अपनी सांस्कृतिक विशिष्टता और कौमी एकता के संदेश के लिए देश-दुनिया में जाना जाता है।
दीपों की आभा और सुर-ताल की स्वर लहरियों से दमका देवा मेले का सांस्कृतिक मंच
देवा मेला की सांस्कृतिक संध्या में कला, संगीत और नृत्य की मनोहारी प्रस्तुतियों ने ऐसा समां बांधा कि पूरा वातावरण उल्लास, उमंग और सांस्कृतिक वैभव से आलोकित हो उठा। कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस गरिमामयी अवसर पर सीडीओ पंकज वर्मा, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) निरंकार सिंह एएसपी उत्तरी विवेक तिवारी तथा उपजिलाधिकारी नवाबगंज गुंजिता अग्रवाल सीएमओ डॉ रंजन गौतम, जॉइंट मजिस्ट्रेट से विद्यांशु शेखर झा सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन प्रवक्ता आशीष पाठक ने किया।

जिलाधिकारी का संदेश : साझा विरासत और सामाजिक समरसता का उत्सव है देवा मेला
जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने देवा मेले की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्ता को रेखांकित करते हुए कहा कि देवा मेला हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक समरसता का अनुपम प्रतीक है। यह आयोजन प्रेम, भाईचारे, सद्भाव और इंसानियत के उन शाश्वत मूल्यों को आत्मसात करने की प्रेरणा देता है, जो भारतीय संस्कृति की वास्तविक पहचान हैं। हजरत हाजी वारिस अली शाह की शिक्षाएं मानवता को आपसी प्रेम, सौहार्द और एकता के सूत्र में पिरोने का संदेश देती हैं। उन्होंने कहा कि देवा मेला विभिन्न समुदायों की साझा सांस्कृतिक विरासत का उत्सव है, जहां देश-विदेश से आने वाले जायरीन, श्रद्धालु और पर्यटक विविधता में एकता की भारतीय परंपरा का अनुभव करते हैं। जिला प्रशासन का प्रयास है कि मेले में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सुरक्षित, सुगम और सुखद वातावरण उपलब्ध कराया जाए तथा इस ऐतिहासिक आयोजन की गरिमा और परंपरा को और अधिक समृद्ध किया जाए।

गणेश वंदना और सूफियाना कव्वाली से गूंजा देवा मेला-2026 का सांस्कृतिक मंच
बाराबंकी। देवा मेला-2026 के उद्घाटन समारोह में बहार सुगम संगीत प्रभाग, बाराबंकी के छात्र-छात्राओं ने गणेश वंदना के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का शुभारंभ किया। इसके बाद संस्था के संस्थापक प्रभात नारायण दीक्षित द्वारा रचित कव्वाली ‘तेरे जलवों के चर्चे सुन-सुनकर मैं आया हूं बाबा’ की भावपूर्ण प्रस्तुति ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। कव्वाली में 33 छात्र-छात्राओं ने सहभागिता की। इसके पश्चात शिवराजे म्यूजिकल बैंड के निर्देशक कार्तिकेय कैलाश दीक्षित एवं उनकी टीम के सदस्य अस्मित, आदि और कृष्णा ने बॉलीवुड गीतों का मैशअप प्रस्तुत कर दर्शकों का मन मोह लिया।संगीत संयोजन में अंजित द्विवेदी (ऑक्टोपैड), आनंद यादव (नाल), सत्येंद्र दास (सिंथेसाइजर), कार्तिकेय कैलाश दीक्षित (गिटार) और शुभांकर साहू (बांसुरी) ने संगत प्रदान की। भक्तिमय और सुरीली प्रस्तुतियों ने मेले के सांस्कृतिक उत्सव को यादगार बना दिया। इन प्रस्तुतियों में भारतीय संस्कृति की बहुरंगी छटा, लोक-जीवन की सहज अभिव्यक्ति और नई पीढ़ी की कलात्मक प्रतिभा के दर्शन हुए। सांस्कृतिक संध्या ने जहां दर्शकों का मनोरंजन किया, वहीं कला के माध्यम से सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का संदेश भी दिया।
इसके उपरांत देवा मेला के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला में अरुणोदय पब्लिक स्कूल की छात्राओं ने ‘महिषासुर मर्दिनी’ गीत पर भावपूर्ण एवं मनोहारी नृत्य प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भक्ति, शक्ति और नारी सामर्थ्य के भावों से ओतप्रोत इस प्रस्तुति ने वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर कर दिया। छात्राओं की भावाभिव्यक्ति, लयबद्ध नृत्य और आकर्षक मंचन को दर्शकों ने सराहा।
आगामी आयोजनों से बढ़ेगा मेले का आकर्षण
देवा मेले के आगामी कार्यक्रमों में खेलकूद, सुगम संगीत और नामचीन कलाकारों की प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। इन आयोजनों के माध्यम से खेल प्रतिभाओं को मंच मिलने के साथ स्थानीय कला, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को प्रोत्साहन मिलेगा। मेले की गतिविधियां स्थानीय कारोबार को भी गति प्रदान करती हैं तथा दुकानदारों, कलाकारों और छोटे व्यापारियों को अपनी आजीविका एवं व्यावसायिक गतिविधियों के विस्तार का अवसर देती हैं। परंपरा, अध्यात्म और आधुनिक मनोरंजन के अनूठे संगम के रूप में देवा मेला नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने और साझा विरासत को अगली पीढ़ियों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
देवा मेला : 28 अक्टूबर के प्रमुख कार्यक्रम
पूर्वाह्न 11 बजे से सायं 4 बजे तक
- हॉकी प्रतियोगिता — खेलकूद मैदान।
- माध्यमिक शिक्षा विभाग के सांस्कृतिक कार्यक्रम — ऑडिटोरियम।
सायं 4 बजे से 7 बजे तक
- सुगम संगीत — ऑडिटोरियम।
सायं 7 बजे से कार्यक्रम की समाप्ति तक
- म्यूजिकल नाइट — इंडियन आइडल फेम मोहम्मद दानिश की प्रस्तुति।
