आरटीआई के जरिए मांगी गई जानकारी को ‘थर्ड पार्टी’ बताकर देने से इनकार, विश्वविद्यालय प्रशासन की पारदर्शिता पर उठे सवाल
रिपोर्ट: एस. मुनीर
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में छात्रसंघ चुनाव पिछले आठ वर्षों से नहीं कराए जाने और छात्रसंघ के नाम पर विद्यार्थियों से लगातार शुल्क वसूले जाने का मामला अब गंभीर सवालों के घेरे में है। छात्रों का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने वर्ष 2017-18 के बाद से छात्रसंघ चुनाव नहीं कराए, जबकि इस दौरान कई बार मांग, विरोध-प्रदर्शन, ज्ञापन और यहां तक कि आमरण अनशन भी किए गए। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से चुनाव नहीं कराने का कोई ठोस कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है।
छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय के अधिनियम और परिनियमों में छात्रसंघ का प्रावधान मौजूद है। विश्वविद्यालय के परिनियम 34 के अनुसार, छात्रसंघ का गठन होना चाहिए। छात्रों का तर्क है कि जब नियमों में छात्रसंघ की व्यवस्था निर्धारित है, तो विश्वविद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह उसका गठन सुनिश्चित करे।
आमरण अनशन के बाद भी नहीं हुए चुनाव
छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर एलएलएम के छात्र सैयद कैफ हसन ने 14 अगस्त 2025 से भूख हड़ताल शुरू की थी, जो नौ दिनों तक चली। बताया जाता है कि इस दौरान कुलपति स्वयं धरना स्थल पर पहुंचीं और चुनाव कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद उन्होंने कैफ हसन को जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया। हालांकि, छात्रों का कहना है कि आश्वासन के बावजूद चुनाव नहीं कराए गए और इस वर्ष भी उन्हें दोबारा धरना-प्रदर्शन तथा आमरण अनशन का रास्ता अपनाना पड़ा।
छात्रसंघ के नाम पर हर साल वसूले जा रहे शुल्क का हिसाब कहां?
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल छात्रसंघ फंड को लेकर उठ रहा है। छात्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय में प्रवेश के समय प्रत्येक वर्ष विद्यार्थियों से छात्रसंघ शुल्क लिया जाता रहा है, जबकि वर्ष 2018-19 से छात्रसंघ अस्तित्व में नहीं है।
छात्रों के मोटे अनुमान के मुताबिक, छात्रसंघ शुल्क के रूप में हर वर्ष लगभग 30 लाख रुपये एकत्र होते हैं। इस हिसाब से आठ वर्षों में करीब 2 करोड़ 50 लाख रुपये की राशि जमा होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
अब सवाल यह है कि जब छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए और छात्रसंघ की गतिविधियां संचालित नहीं हुईं, तो इन वर्षों में एकत्रित धनराशि कहां रखी गई? इसका उपयोग किस मद में किया गया और वर्तमान में छात्रसंघ फंड में कितनी राशि उपलब्ध है?
छात्रों का कहना है कि छात्रसंघ के गठन के बाद इस फंड का उपयोग छात्रसंघ भवन के सुधार, विद्यार्थियों की सुविधाओं और अन्य छात्रहित से जुड़े कार्यों में किया जा सकता है। लेकिन इसके लिए सबसे पहले फंड का पूरा हिसाब सार्वजनिक होना चाहिए।
आरटीआई में जानकारी मांगने पर मिला ‘थर्ड पार्टी’ का हवाला
इस मामले में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले दर्शनशास्त्र के विद्वान और आरटीआई कार्यकर्ता प्रो. तारिक इस्लाम ने विश्वविद्यालय में आरटीआई आवेदन दाखिल कर वर्ष 2018-19 से अब तक छात्रसंघ फंड में वर्षवार जमा हुई धनराशि और कुल उपलब्ध राशि का विवरण मांगा।
प्रो. इस्लाम के अनुसार, आरटीआई अधिनियम के तहत निर्धारित 30 दिनों की अवधि में उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने अपील दायर की। अपील के बाद विश्वविद्यालय के केंद्रीय जन सूचना अधिकारी (CPIO) एवं एएफओ (स्टूडेंट्स) मोहम्मद आमिल की ओर से जवाब दिया गया कि मांगी गई जानकारी ‘थर्ड पार्टी’ से संबंधित है और आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(e) के तहत इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता।
इस जवाब पर प्रो. तारिक इस्लाम ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि धारा 8(1)(e) मुख्य रूप से फिड्यूशियरी यानी न्यासीय संबंध में प्राप्त जानकारी से संबंधित है, जबकि ‘थर्ड पार्टी’ का प्रावधान धारा 2(n) में परिभाषित है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि सूचना वास्तव में किसी तीसरे पक्ष से संबंधित थी, तो आरटीआई अधिनियम की धारा 11 के तहत निर्धारित प्रक्रिया पर विचार क्यों नहीं किया गया।
प्रो. इस्लाम का तर्क है कि विद्यार्थियों से विश्वविद्यालय द्वारा छात्रसंघ शुल्क के रूप में एकत्र की गई राशि सार्वजनिक प्रशासनिक गतिविधि का हिस्सा है। इसलिए इस धनराशि का विवरण और उसके उपयोग की जानकारी पारदर्शिता तथा व्यापक जनहित के दायरे में आती है।
छात्रसंघ के मानद कोषाध्यक्ष की भूमिका पर भी सवाल
मामले में एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू छात्रसंघ के मानद कोषाध्यक्ष का है। छात्रसंघ के नियमों के अनुसार, विश्वविद्यालय के शिक्षण स्टाफ से एक सदस्य को छात्रसंघ की कार्यकारिणी समिति द्वारा नए छात्रसंघ के कार्यभार संभालने के एक महीने के भीतर मानद कोषाध्यक्ष चुना जाता है।
हालांकि, AMU की आधिकारिक वेबसाइट पर छात्रसंघ के मानद कोषाध्यक्ष के रूप में प्रो. मोहम्मद नफीस ए. अंसारी का नाम वर्ष 2017 से प्रदर्शित होने की बात सामने आई है।
वहीं, परिसर में ऐसी चर्चाएं भी हैं कि छात्रसंघ फंड की बड़ी धनराशि को विश्वविद्यालय के कॉर्पस फंड में स्थानांतरित कर दिया गया है। हालांकि, इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। छात्रों और संबंधित लोगों की मांग है कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस विषय पर स्थिति स्पष्ट करे और यदि किसी प्रकार का धन हस्तांतरण हुआ है, तो उसका पूरा विवरण सार्वजनिक करे।
अब विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब की मांग
आठ वर्षों से छात्रसंघ चुनाव न होना, विद्यार्थियों से लगातार शुल्क वसूला जाना, आरटीआई के माध्यम से मांगी गई जानकारी उपलब्ध न कराना और फंड के संभावित हस्तांतरण को लेकर उठ रहे सवालों ने विश्वविद्यालय की वित्तीय पारदर्शिता पर बहस छेड़ दी है।
छात्रों की मांग है कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रसंघ चुनाव कराने की समयसीमा घोषित करे, वर्षवार शुल्क संग्रह का ब्योरा सार्वजनिक करे तथा छात्रसंघ फंड की वर्तमान स्थिति और उसके खर्च का पूरा ऑडिट विवरण उपलब्ध कराए।
अब देखना यह है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय प्रशासन इन सवालों पर क्या आधिकारिक जवाब देता है और छात्रसंघ चुनाव तथा फंड से जुड़े विवाद का समाधान किस प्रकार करता है।
