नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सत्तारूढ़ भाजपा सरकार पर विकसित भारत–रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) विधेयक, 2025 (VB-G RAM-G) को बिना पर्याप्त चर्चा और विमर्श के पारित कराने का गंभीर आरोप लगाया है। राहुल गांधी ने कहा कि यह विधेयक विकास लाने के बजाय लाखों भारतीयों की आजीविका के लिए खतरा बन सकता है।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया में लिखा कि “कोई सार्वजनिक चर्चा नहीं, संसद में कोई ठोस विचार-विमर्श नहीं और राज्यों की सहमति भी नहीं—मोदी सरकार ने एमजीएनआरईजीए और लोकतंत्र दोनों पर ही बुलडोजर चला दिया है। यह विकास नहीं, बल्कि विनाश है।”
उन्होंने कहा कि इसका सीधा खामियाजा मेहनतकश ग्रामीण आबादी को अपनी रोज़ी-रोटी खोकर भुगतना पड़ेगा।
राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी द्वारा एक प्रमुख अंग्रेजी दैनिक में लिखे गए संपादकीय लेख को पढ़ने की अपील करते हुए कहा कि उसमें इस विधेयक से जुड़े हर गंभीर पहलू को विस्तार से उजागर किया गया है।
उल्लेखनीय है कि संसद ने 18 दिसंबर को VB-G RAM-G विधेयक पारित किया था, जिसे 21 दिसंबर को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गई। विधेयक के तहत ग्रामीण परिवारों के प्रत्येक वयस्क सदस्य को अकुशल शारीरिक श्रम के लिए 100 दिनों के बजाय 125 दिनों का मजदूरी रोजगार देने का प्रावधान किया गया है।
विधेयक की धारा 22 के अनुसार केंद्र और राज्यों के बीच निधि बंटवारे का अनुपात 60:40 रहेगा। वहीं पूर्वोत्तर राज्यों, हिमालयी राज्यों, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे केंद्र शासित प्रदेशों के लिए यह अनुपात 90:10 निर्धारित किया गया है।
इसके अलावा, धारा 6 के तहत राज्य सरकारों को यह अधिकार दिया गया है कि वे कृषि के चरम मौसम—जैसे बुवाई और कटाई—को ध्यान में रखते हुए वित्तीय वर्ष में 60 दिनों तक की अवधि को अग्रिम रूप से अधिसूचित कर सकें।
इस बीच, सोनिया गांधी ने अपने संपादकीय लेख में केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह एमजीएनआरईजीए और अन्य महत्वपूर्ण कानूनों में बदलाव कर अधिकार-आधारित विधायी ढांचे को कमजोर करने की कोशिश कर रही है, जिससे ग्रामीण गरीबों की संवैधानिक सुरक्षा पर संकट खड़ा हो सकता है।

