लखनऊ।बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती की प्रेस कॉन्फ्रेंस उस समय अचानक सुर्खियों में आ गई, जब मंच पर लगे प्रकाश उपकरण से धुआं निकलता दिखा और पूरा कार्यक्रम कुछ देर के लिए रोकना पड़ा। यह घटना उनके जन्मदिन के मौके पर हुई, जब वे पार्टी की राजनीतिक दिशा और आने वाले चुनावों पर बड़ा संदेश देने वाली थीं।
हालांकि स्थिति पर जल्द ही काबू पा लिया गया, लेकिन इसके बाद मायावती ने जो कहा, उसने उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज कर दी।
“बसपा आंदोलन को रोकने की साजिश” — कांग्रेस और भाजपा पर हमला
मायावती ने तीखे तेवर में कहा कि
“कांग्रेस और भाजपा हमेशा से बसपा आंदोलन को खत्म करने की कोशिश करती रही हैं, लेकिन बहुजन की ताकत को कोई रोक नहीं सकता।”
उन्होंने कहा कि सत्ता में रहते हुए भी इन दलों ने दलितों और पिछड़ों के हितों को केवल वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया।
ब्राह्मण समाज को संदेश: ‘किसी की भीख की जरूरत नहीं’
बसपा प्रमुख ने साफ कहा कि ब्राह्मण समाज को किसी पार्टी के बहकावे में नहीं आना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बसपा ने हमेशा ब्राह्मणों को सम्मान दिया है और आगे भी देगी।
“बसपा सरकार बनी तो ब्राह्मण, क्षत्रिय, जाट, दलित और अल्पसंख्यक—सबका बराबर सम्मान होगा।”
2007 का ‘मैजिक फॉर्मूला’ फिर मैदान में?
मायावती ने 2007 के विधानसभा चुनाव को याद दिलाते हुए कहा कि सामाजिक इंजीनियरिंग कोई नारा नहीं, बल्कि ज़मीनी सच्चाई है।
उस समय 86 ब्राह्मण उम्मीदवारों को टिकट मिला और 41 जीतकर विधानसभा पहुंचे—नतीजा, पूर्ण बहुमत की सरकार।
राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि मायावती एक बार फिर उसी फॉर्मूले को री-लॉन्च करने के संकेत दे रही हैं।
सपा पर पुराना हमला, भाजपा पर नया आरोप
मायावती ने समाजवादी पार्टी को “गुंडागर्दी की राजनीति” से जोड़ा और स्टेट गेस्ट हाउस कांड का ज़िक्र किया।
वहीं भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि आज प्रदेश में दलित सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं और कानून-व्यवस्था केवल कागज़ों में बेहतर है।
EVM पर बड़ा बयान: “चुनाव बैलेट से हों”
प्रेस कॉन्फ्रेंस का सबसे बड़ा सियासी संदेश तब आया, जब मायावती ने कहा कि
EVM पर जनता का भरोसा टूट रहा है और लोकतंत्र को बचाने के लिए चुनाव मतपत्रों से कराए जाने चाहिए।

