आगरा: सातवाँ ग्लोबल ताज इंटरनेशनल फ़िल्म फेस्टिवल के दूसरे दिन शहर में फ़िल्मों का रंगारंग मेला लगा। चिल्ड्रेन डे के अवसर पर बच्चों ने भी फ़िल्मों का आनंद लिया। दर्शकों की भीड़ इतनी ज़्यादा थी कि हाल में जगह मिलना मुश्किल हो गया।
ओपनिंग फ़िल्म “बंगाल 1947” ने फिर से सभी का दिल जीत लिया। आज सुबह से ही फ़िल्मों का सिलसिला शुरू हुआ और देर शाम तक चलता रहा।
मेहमानों में मेवाड़ यूनिवर्सिटी के चांसलर डॉ. अशोक गाड़िया, प्रोफ़ेसर लवकुश मिश्रा, दिलीप दलवी (फ़िल्म क्राफ्ट, मुंबई), टी. एस. राणा (ऑल सेंट्स स्कूल), वी. के. मित्तल (वनस्थली), बी. एस. जोगदंड, राकेश शंकर राव गायकवाड़, राजेश गोयल (कैंटोनमेंट माना कैटर्स) और सतीश अरोड़ा (पूनम प्लाज़ा) शामिल रहे। अतिथियों का स्वागत मेमेंटो पटका देकर किया गया।
डॉ. अशोक गाड़िया और फ़ेस्टिवल डायरेक्टर सूरज तिवारी ने ओपन मंच पर पैनल डिस्कशन भी किया, जिसका विषय “शिक्षा और फ़िल्म” था। डॉ. गाड़िया ने कहा कि यूनिवर्सिटी फ़िल्ममेकरों के लिए हर तरह से तैयार है और सिनेमा को रोजगार और नवाचार से जोड़ना चाहिए।
आज की फ़िल्मों में शामिल थे:
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कर्मा (फ़्रांस)
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कॉलेज दया (आई. टी. एच. एम, डॉ. भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी)
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तेरे ही भरोसे (आगरा)
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लुकिंग फॉर यू (जर्मनी)
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स्पिरिचुअलाइज़ेशन ऑफ़ जेफ़ बॉयर (स्विट्ज़रलैंड)
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एग्वा (आंध्र प्रदेश)
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पेटा (श्रीलंका)
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अनादित्य (बांग्लादेश)
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अंडरहीडर (उज़्बेकिस्तान)
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डी. एम. अदिति की रोशनी (मुंबई)
दर्शकों ने फ़िल्मों का भरपूर आनंद लिया और ए.आई. से बनी फ़िल्म की भी विशेष सराहना की। “बंगाल १९४७” की प्रदर्शनी और निर्देशक आकाशादित्य लामा व प्रोड्यूसर ऋषभ पांडा व सतीश पांडा को दर्शकों ने तारीफ़ों के पुल बाँधे।
फ़ेस्टिवल डायरेक्टर सूरज तिवारी ने बताया कि आख़िरी दिन अवॉर्ड्स समारोह होगा और पूरे दिन देश-विदेश की फ़िल्में दिखाई जाएँगीं।
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