संवाद – एस मुनीर
अलीगढ़,अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के दवाखाना तिब्बिया कॉलेज (डीटीसी) ने यूनानी चिकित्सा की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने पर प्लेटिनम जयंती व डीलर्स मीट का आयोजन मेडिकल कालिज के सभागार में किया गया। वर्ष 1950 में अजमल खान तिब्बिया कॉलेज (एकेटीसी) के अंतर्गत एक छोटे से दवाखाने के रूप में स्थापित डीटीसी आज भारत की सबसे विश्वसनीय यूनानी औषधि संस्थाओं में से एक है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता एएमयू की कुलपति प्रो. नइमा खातून ने की, जिन्होंने मुख्य संरक्षक के रूप में तीन महत्वपूर्ण पहलों का औपचारिक शुभारंभ किया। इनमें 75 वर्ष पूर्ण होने का नया लोगो, पूरी तरह अपडेटेड डीटीसी की आधिकारिक वेबसाइट, तथा ‘शरबत दिलजील’ सभी आयु समूहों के लिए उपयुक्त तैयार-पेय हर्बल एनर्जी ड्रिंक शामिल हैं। अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति प्रो. नइमा खातून ने डीटीसी टीम को दशकों से उत्कृष्टता बनाए रखने के लिए बधाई दी और विश्वास व्यक्त किया कि आधुनिकीकरण और नवाचार पर नए सिरे से फोकस के साथ दवाखाना वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाने के लिए तैयार है।
मुख्य अतिथि और पूर्व कार्यवाहक कुलपति प्रो. मोहम्मद गुलरेज ने दवाखाना की एएमयू में ऐतिहासिक प्रतिष्ठा की सराहना की और शोध-आधारित नवाचार के माध्यम से विस्तार का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आजादी के सौवें वर्ष तक डीटीसी की दवाइयाँ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी जगह बना लेंगी।
संस्थागत दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए एएमयू के रजिस्ट्रार और डीटीसी के ऑक्यूपायर प्रो. आसिम जफर ने 75 वर्ष पूरे होने को एक असाधारण उपलब्धि बताया और गुणवत्ता नियंत्रण तथा सार्वजनिक सेवा के प्रति डीटीसी की निरंतर प्रतिबद्धता की सराहना की।
मानद् अतिथि, प्रो. सैयद शाह आलम (एनआईयूएम, बेंगलुरु) ने डीटीसी को यूनानी विरासत का संरक्षक बताते हुए विश्वास और प्रामाणिकता पर आधारित इसकी पहचान की प्रशंसा की। उन्होंने यूनानी चिकित्सा को आम जनता के लिए अधिक सुलभ और किफायती बनाने की आवश्यकता पर बल दिया, अन्य मानद् अतिथि प्रो. गुलशन वाधवा, सलाहकार एवं वैज्ञानिक (सेवानिवृत्त), डीबीटी, ने दवाखाना की नीतियों के प्रति प्रतिबद्धता, गुणवत्ता की निरंतरता और कम विज्ञापन के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर इसकी ब्रांड पहचान की सराहना की।
डीटीसी की विरासत पर प्रकाश डालते हुए प्रो. एस.एम. सफदर अशरफ, डीन फैकल्टी ऑफ यूनानी मेडिसिन, ने इसके 75 वर्षीय योगदान की प्रशंसा की और कहा कि अगला चरण यूनानी चिकित्सा के वैज्ञानिक आधार को मजबूत करने के लिए समर्पित अनुसंधान एवं विकास पहलों को शामिल करेगा।
इससे पूर्व, मेम्बर इंचार्ज, प्रो. रियाज अहमद ने अतिथियों का स्वागत किया और दवाखाना की यात्रा का विवरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि कैसे यह एक छोटे दवाखाने से गुणवत्ता-युक्त यूनानी औषधियों के राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त निर्माता के रूप में विकसित हुआ। एकेटीसी के प्रिंसिपल प्रो. बदरुद्दुज्जा खान ने पारंपरिक यूनानी चिकित्सा को संरक्षित और प्रोत्साहित करने में डीटीसी की मूलभूत भूमिका को रेखांकित किया और बताया कि यह एकेटीसी प्रणाली की सबसे पुरानी इकाइयों में से एक है।
कार्यक्रम का समापन डीटीसी के महाप्रबंधक मोहम्मद शारिक आजम द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।कार्यक्रम का संचालन शोधार्थी यशा तैमूरी और ऐमन हफीज़ खान ने संयुक्त रूप से किया। उद्घाटन समारोह में मोहम्मद साकिब और शारिक द्वारा दवाखाना उत्पाद के टीजर का लोकार्पण भी अतिथियों द्वारा किया गया।

