गुवाहाटी से बड़ी राजनीतिक खबर—असम कांग्रेस में सोमवार को सियासी हलचल उस वक्त तेज हो गई जब पूर्व प्रदेश अध्यक्ष Bhupen Kumar Borah ने अपने इस्तीफे की पुष्टि कर दी। हालांकि कुछ ही घंटों में हालात बदले और पार्टी हाईकमान ने उनका इस्तीफा स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
राहुल गांधी ने की सीधी बात
असम इकाई के प्रमुख Gaurav Gogoi ने खुलासा किया कि कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने खुद भूपेन बोराह से बातचीत की। करीब तीन घंटे चली चर्चाओं के बाद मामला शांत हुआ।
गोगोई ने कहा, “भूपेन कुमार बोराह हमारी संपत्ति हैं। अगर कोई गलती हुई हो तो एक भाई के नाते मैं उनसे माफी मांगता हूं।”
हाईकमान ने नहीं स्वीकारा इस्तीफा
असम कांग्रेस प्रभारी Bhanwar Jitendra Singh ने कहा कि बोराह कांग्रेस परिवार के महत्वपूर्ण सदस्य हैं और उनका इस्तीफा पार्टी अध्यक्ष ने स्वीकार नहीं किया है। उन्होंने बताया कि मतभेद बातचीत से सुलझा लिए गए हैं।
बोराह पिछले 30 वर्षों से कांग्रेस से जुड़े हैं और 2021 से 2025 तक असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे। वे असम में दो बार विधायक भी रह चुके हैं।
इस्तीफे की वजह पर चुप्पी
हालांकि बोराह ने अपने फैसले के पीछे के कारणों पर खुलकर कुछ नहीं कहा। उन्होंने संकेत दिया कि “बेहाली प्रकरण” से जुड़े आंतरिक मतभेद इसकी जड़ हो सकते हैं।
पत्रकारों से उन्होंने सिर्फ इतना कहा—
“मैंने अपना इस्तीफा उच्च कमान को भेज दिया है। जब जरूरी समझूंगा, तब विस्तार से बात करूंगा।”
बीजेपी का ऑफर भी आया सामने
इस पूरे घटनाक्रम के बीच असम के मुख्यमंत्री Himanta Biswa Sarma ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि भाजपा के दरवाजे भूपेन बोराह के लिए खुले हैं। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर बोराह भाजपा में शामिल होते हैं तो उन्हें “सुरक्षित सीट” से चुनाव जिताने की कोशिश की जाएगी।
क्या है सियासी संदेश?
- कांग्रेस में अंदरूनी मतभेद की आहट
- राहुल गांधी की सीधी दखल से मामला संभला
- बीजेपी की रणनीतिक पेशकश से सियासी तापमान और बढ़ा
- 2026 विधानसभा चुनाव से पहले असम की राजनीति में हलचल तेज
असम की राजनीति में यह प्रकरण सिर्फ एक इस्तीफे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आने वाले चुनावी समीकरणों का संकेत भी माना जा रहा है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या भूपेन बोराह खुलकर अपनी नाराजगी की वजह बताएंगे या कांग्रेस में रहकर नई भूमिका निभाएंगे।
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