- लखनऊ, कांग्रेस के प्रखर युवा नेता और प्रदेश संगठन के न्याय योद्धा अयाज़ खान अच्छू ने कर्नाटक के आलंद विधानसभा क्षेत्र में सामने आए कथित “वोटर लिस्ट घोटाले” पर बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि “SIT की जांच और सोशल मीडिया से सामने आई विश्वसनीय जानकारियों ने बीजेपी की वोट चोरी की साज़िश का असली चेहरा बेनकाब कर दिया है।”
अयाज़ खान अच्छू के अनुसार, जांच में खुलासा हुआ है कि हर मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से हटाने के लिए लगभग ₹80 तक का सौदा किया गया था।
उन्होंने मीडिया से बातचीत में बताया — “कर्नाटक के आलंद में 6,000 से अधिक मतदाताओं के नाम फर्जी तरीके से हटाए गए। यह सिर्फ चुनावी धांधली नहीं, बल्कि लोकतंत्र की हत्या है। बीजेपी ने जनता की आवाज़ को कुचलने की साज़िश रची है।”
🔍 SIT जांच में क्या सामने आया?
न्याय योद्धा अयाज़ खान अच्छू ने बताया कि SIT ने BJP नेता सुभाष गुट्टेदार के ठिकानों पर छापेमारी की है, जहां से लैपटॉप और मोबाइल जब्त किए गए हैं। इन उपकरणों में चुनावी डेटा से छेड़छाड़ के पुख्ता सबूत मिले हैं।
उन्होंने कहा कि ये तथ्य डिजिटल फॉरेंसिक रिपोर्ट, सोशल मीडिया पोस्ट्स और स्थानीय जांच अधिकारियों के आधिकारिक बयानों से भी प्रमाणित होते हैं।
⚖️ “गरीबों और वंचितों की आवाज़ दबाने की कोशिश”
अयाज़ खान अच्छू ने भाजपा पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा —“यह गरीबों, दलितों और वंचितों की आवाज़ मिटाने की साज़िश है। लेकिन अब जनता सब समझ चुकी है। देश का नौजवान इन ‘वोट चोरों’ को जवाब देगा।”
उन्होंने मांग की कि इस साजिश में शामिल सभी जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई हो और चुनाव आयोग मतदाता सूची की पुनः समीक्षा कर निष्पक्ष जांच रिपोर्ट जारी करे।
🗳️ पृष्ठभूमि: कब शुरू हुआ मामला?
यह मामला सितंबर 2023 में आलंद विधानसभा क्षेत्र में तब उजागर हुआ था जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और विधायक बी.आर. पाटिल ने मतदाता सूची से 6,000 से अधिक नाम हटाए जाने का आरोप लगाया था।
राहुल गांधी ने भी सितंबर 2025 में इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया था, जिसके बाद कर्नाटक सरकार ने SIT (विशेष जांच दल) का गठन किया।
अक्टूबर 2025 में आई SIT की ताज़ा रिपोर्ट में मतदाता सूची से नाम हटाने के बदले भुगतान किए जाने के प्रमाण सामने आए हैं।
📢 कांग्रेस का ऐलान: बूथ स्तर तक निगरानी अभियान
अयाज़ खान अच्छू ने कहा कि कांग्रेस अब लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए हर राज्य और बूथ स्तर पर निगरानी अभियान चलाएगी, ताकि कोई भी मतदाता किसी तरह की धोखाधड़ी या दबाव का शिकार न हो।

