नई दिल्ली। आईपीएल 2026 के लिए कोलकाता नाइट राइडर्स (केकेआर) टीम में बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को शामिल किए जाने को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। टीम के मालिक और बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के खिलाफ राजनीतिक और धार्मिक संगठनों के स्वर लगातार तीखे होते जा रहे हैं।
पूर्व भाजपा विधायक संगीत सोम द्वारा शाहरुख खान को लेकर दिए गए बयान के बाद अब देश के विभिन्न हिस्सों से धर्मगुरु और कथावाचक भी विरोध में उतर आए हैं।
गुरुवार को नागपुर में जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं पर हो रहे कथित हमलों के बीच किसी बांग्लादेशी खिलाड़ी को टीम में शामिल करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ऐसे फैसले देश की भावनाओं को आहत करते हैं और इस पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रहे कथित अत्याचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सरकार को इन घटनाओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश के इतिहास में हिंदुओं के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता।
वहीं मुंबई में श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर ने भी इस फैसले पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जब पड़ोसी देश में अल्पसंख्यकों के साथ हिंसा की खबरें सामने आ रही हैं, तब ऐसे समय में किसी बांग्लादेशी खिलाड़ी को टीम में शामिल करना गलत संदेश देता है। उन्होंने शाहरुख खान को संबोधित करते हुए कहा कि जनता ही किसी कलाकार को ऊँचाई तक पहुँचाती है और वही उसे अस्वीकार भी कर सकती है।
अलीगढ़ से शाही चीफ मौलाना चौधरी इफराहीम हुसैन ने कहा कि केकेआर द्वारा लिया गया यह निर्णय इंसानियत और नैतिकता की कसौटी पर खरा नहीं उतरता। उन्होंने कहा कि खेल या व्यापार से जुड़े किसी भी फैसले को सामाजिक और नैतिक दृष्टिकोण से भी परखा जाना चाहिए।
गौरतलब है कि मुस्तफिजुर रहमान को लगभग नौ करोड़ रुपये में खरीदे जाने की खबर सामने आने के बाद देश के विभिन्न हिस्सों में नाराजगी देखी जा रही है। आलोचकों का कहना है कि जब बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की बातें सामने आ रही हों, तब इस तरह का करार देशहित की भावना के विपरीत माना जा रहा है।
इस बीच महाराष्ट्र अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष प्यारे खान ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने शाहरुख खान से अपील करते हुए कहा कि यदि भारतीय मूल के लोगों को बांग्लादेश में अन्याय का सामना करना पड़ रहा है, तो ऐसे में बांग्लादेशी खिलाड़ियों पर प्रतिबंध लगाकर एक कड़ा संदेश दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे इस मामले को केंद्र सरकार के समक्ष उठाएंगे।

