आगरा। आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) के अधिकारियों की जानकारी में होने के बावजूद माननीय उच्च न्यायालय एवं सिविल न्यायालय के आदेशों का उल्लंघन करते हुए कोठी मीना बाजार, मौजा खतैना स्थित गाटा संख्या 560 पर चार मंजिला इमारत का अवैध निर्माण कर दिया गया है। बताया गया है कि उक्त भूमि सरकार की निष्क्रांत संपत्ति है, जिस पर न्यायालय द्वारा स्पष्ट रूप से निर्माण पर रोक लगाई गई है।
आरोप है कि चरणबद्ध तरीके से पहले यहां स्थित तालाब को योजनाबद्ध ढंग से पाटा गया और उसके बाद सभी नियमों को ताक पर रखते हुए नक्शा पास कराकर चार मंजिला भवन का निर्माण शुरू कर दिया गया। जबकि इस भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण किया जाना नियमों के विरुद्ध है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इस अवैध निर्माण को लेकर संबंधित अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन जिम्मेदारी एक-दूसरे पर डालते हुए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इस पूरे प्रकरण की जानकारी जिलाधिकारी कार्यालय और आगरा विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को भी होने के बावजूद अवैध निर्माण खुलेआम होता रहा।
प्रश्न यह उठ रहा है कि जहां गरीबों की झोपड़ियों पर तुरंत बुलडोजर चल जाता है, वहीं एक अवैध चार मंजिला इमारत पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही। क्या कोई बिल्डर इतना प्रभावशाली है कि प्रशासन और नियम उसके सामने कमजोर पड़ गए हैं? शहर के भीतर मौजूद एक तालाब को समाप्त कर देना न केवल पर्यावरणीय अपराध है, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का भी गंभीर उदाहरण है।
शिकायत के बाद भले ही निर्माण कार्य को फिलहाल रोक दिया गया हो, लेकिन अब तक अवैध निर्माण को ध्वस्त नहीं किया गया है, जबकि जहां निर्माण की अनुमति ही नहीं थी, वहां इतना बड़ा ढांचा खड़ा हो जाना कई सवाल खड़े करता है। इससे संबंधित अधिकारियों की भूमिका और संभावित मिलीभगत पर भी संदेह उत्पन्न होता है।
मांग की गई है कि इस मामले में शीघ्र कार्रवाई करते हुए अवैध निर्माण को ध्वस्त कराया जाए और पाटे गए तालाब को पुनः बहाल किया जाए। चेतावनी दी गई है कि यदि प्रशासन ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाया तो पाटे गए तालाब स्थल पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।

