कौन हैं बाबा साहेब को अंग्रेजों का एजेंट बताने वाले एडवोकेट अनिल मिश्रा?
नई दिल्ली। सोशल मीडिया पर पिछले कुछ दिनों से एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अनिल मिश्रा डॉ. भीमराव अंबेडकर को लेकर विवादित और भड़काऊ बयान देते दिख रहे हैं। अपने बयान में उन्होंने दावा किया कि “डॉ. अंबेडकर न तो दलित थे और न ही उन्होंने संविधान बनाया।” इतना ही नहीं, उन्होंने अंबेडकर को अंग्रेजों का एजेंट तक बताने की बात कही, जिसके बाद चारों ओर तीखी प्रतिक्रियाएँ शुरू हो गईं।
कौन हैं एडवोकेट अनिल मिश्रा?
अनिल मिश्रा पेशे से वकील हैं और सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं। विवादित बयानों के कारण वे समय–समय पर चर्चा में रहते हैं। अंबेडकर पर दिया गया ताज़ा बयान पहली बार नहीं है जब वे किसी बड़े मुद्दे पर नकारात्मक टिप्पणियों को लेकर सुर्खियों में आए हों।
वायरल वीडियो में क्या कहा?
वायरल क्लिप में मिश्रा कहते हैं कि:
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अंबेडकर संविधान निर्माता नहीं थे।
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वे अंग्रेजों द्वारा इस्तेमाल किए गए व्यक्ति थे।
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उन्हें ‘दलित’ कहना ऐतिहासिक रूप से गलत है।
इस बयान को इतिहासकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और दलित संगठनों ने तथ्यहीन, भड़काऊ और समुदाय को उकसाने वाला बताया है।
विरोध और प्रतिक्रियाएँ
अंबेडकर विचारधारा से जुड़े संगठनों ने मिश्रा पर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। ट्विटर/X पर #RespectAmbedkar और #ActionAgainstAnilMishra जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। कई नेताओं ने भी इस बयान को “सोच में प्रदूषण” बताया।
इतिहासकारों का क्या कहना है?
संविधान के विशेषज्ञों का कहना है कि:
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डॉ. अंबेडकर संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी के चेयरमैन थे।
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उन्होंने संविधान निर्माण की दिशा, रूपरेखा और बुनियादी सिद्धांत तय किए।
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उन्हें ‘दलित’ शब्द से संबोधित करना आधुनिक सामाजिक-राजनीतिक संदर्भ में स्वीकार्य और मान्य है।
इतिहासकारों के अनुसार मिश्रा का दावा तथ्यों के विपरीत है।

