डॉ. इज़हार अहमद ख़ान उमरी, उमरी पब्लिक स्कूल, आगरा के संस्थापक प्रबंधक, एक प्रतिष्ठित कवि, साहित्यकार और विद्वान थे। उन्होंने शिक्षा और साहित्य के क्षेत्र में अपनी सेवाओं से न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाई।
डॉ. उमरी ने अपने सेवाकाल के दौरान पूर्व माध्यमिक विद्यालय, आगरा में अध्यापक के रूप में कार्य किया और उन्होंने विद्यार्थियों के जीवन में ज्ञान और प्रेरणा का दीप जलाया। अपने समर्पित सेवाकाल में, 18 अप्रैल 2011 को उनका आकस्मिक निधन हो गया, जिसने शिक्षा और साहित्य की दुनिया को अपूरणीय क्षति पहुँचाई।
एक कवि, लेखक और शोधकर्ता के रूप में डॉ. उमरी ने हिंदी, उर्दू, अंग्रेज़ी और संस्कृत में महारत हासिल की। उनकी प्रमुख साहित्यिक कृति “संघर्ष” और अन्य शोध ग्रंथ शिक्षा और समाज के लिए अमूल्य योगदान साबित हुए हैं। साहित्य में उनके योगदान को न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया। अमेरिका की एक प्रमुख साहित्यिक संस्था ने उन्हें दो बार “मैन ऑफ द ईयर” के सम्मान से नवाजा।
डॉ. उमरी की सेवाओं और उपलब्धियों का उच्चतम सम्मान यह है कि भारत सरकार ने उनके सम्मान में डाक टिकट जारी किया, जो उनके योगदान और समाज में उनके प्रभाव का प्रतीक है।
सिर्फ साहित्य तक ही सीमित नहीं, डॉ. उमरी ने कला और फ़िल्म क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। उत्तर प्रदेश में बनने वाली एक हिंदी फिल्म में उन्होंने संवाद लेखन और अभिनय दोनों में हिस्सा लिया।
डॉ. उमरी का परिवार भी शिक्षा और कला के प्रति समर्पित है। उनके पुत्र अज़हर उमरी वरिष्ठ पत्रकार हैं, तलत उमरी अभिनेता एवं निर्देशक, दानिश उमरी पत्रकार, और डॉ. सुहैल उमरी हैं। उनकी पत्नी बेगम रिहाना सलीमी उमरी पब्लिक स्कूल की चेयरमैन के रूप में शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय योगदान देती रही हैं।
डॉ. इज़हार अहमद ख़ान उमरी का जीवन शिक्षा, साहित्य, कला और सामाजिक सेवा का संगम था। उनका निधन भले ही हमें हुआ, लेकिन उनके योगदान और प्रेरणा की लौ आज भी विद्यार्थियों और साहित्यकारों के दिलों में जीवित है।

