संवाद – तौफ़ीक़ फारुकी
राजपूत रेजिमेंटल सेंटर फतेहगढ़ में बाई-एनियल कॉन्फ्रेंस सम्पन्न, सेना के गैर-राजनीतिक और गैर-सांप्रदायिक चरित्र को बताया सबसे बड़ी ताकत
फर्रुखाबाद/फतेहगढ़। भारतीय थल सेना में पश्चिमी कमान के पूर्व जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल मनोज कुमार कटियार ने कहा कि आने वाले समय में युद्ध की प्रकृति तेजी से बदल रही है और ड्रोन-आधारित युद्ध निर्णायक भूमिका निभाएंगे। वह यह बातें फतेहगढ़ स्थित राजपूत रेजिमेंटल सेंटर में आयोजित बाई-एनियल कॉन्फ्रेंस के समापन अवसर पर पत्रकारों से बातचीत में कह रहे थे।

रविवार को लेफ्टिनेंट जनरल कटियार ने राजपूत रेजिमेंट के ‘कर्नल ऑफ द रेजिमेंट’ की बैटन, लेफ्टिनेंट जनरल एस.एस. साही को सौंपी। सम्मेलन के अंतिम दिन उन्होंने देश की मौजूदा सुरक्षा स्थिति, सीमाई चुनौतियों और सेना की तैयारियों पर विस्तार से बात की।
चीन-पाक सीमा पर खतरा बरकरार, ढील अस्वीकार्य – कटियार
उन्होंने स्पष्ट कहा कि चीन और पाकिस्तान, दोनों सीमाओं पर खतरा लगातार मौजूद है। इसलिए ऑपरेशनल तैयारियों में किसी भी तरह की ढील स्वीकार नहीं की जा सकती।
उन्होंने बताया कि भारतीय सेना आज पहले की तुलना में कहीं अधिक मजबूत और सुसज्जित है।
उन्होंने हाल ही में सफल ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए कहा कि पहलगाम हमले में शामिल आतंकवादियों को उनके ठिकानों पर जाकर समाप्त किया गया, जो सेना का बड़ा ऑपरेशनल अचीवमेंट था।

ड्रोन युद्ध पर विशेष प्रशिक्षण की ज़रूरत
भविष्य के युद्धों पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ड्रोन-आधारित युद्ध निर्णायक होंगे। इसलिए अग्निवीरों सहित सभी सैनिकों के प्रशिक्षण में ड्रोन संचालन, निगरानी और सुरक्षा उपायों पर विशेष फोकस करना अत्यंत आवश्यक है।
सेना का गैर-राजनीतिक चरित्र हमारी सबसे बड़ी शक्ति
उन्होंने दोहराया कि भारतीय सेना की गैर-राजनीतिक और गैर-सांप्रदायिक प्रकृति ही उसकी सबसे बड़ी ताकत है और इसे हर हाल में बनाए रखना आवश्यक है।
फतेहगढ़ स्थित राजपूत रेजिमेंटल सेंटर के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 1921 से यह केंद्र देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि देश के पहले कमांडर-इन-चीफ फील्ड मार्शल के.एम. करिअप्पा भी इसी रेजिमेंट से थे।
रेजिमेंट के शौर्य का गौरव – नायक नाथ सिंह
उन्होंने परमवीर चक्र विजेता नायक नाथ सिंह के अदम्य साहस का स्मरण करते हुए कहा कि खजूरी में बना उनका स्मारक भारतीय सैनिकों के शौर्य का जीवंत प्रतीक है।
जनरल ने बताया कि वर्तमान में रेजिमेंट की 25 यूनिटें पूर्वी लद्दाख, अरुणाचल और विभिन्न सीमाई क्षेत्रों में तैनात हैं और सरहदों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

