नई दिल्ली। देश की राजनीति में बड़ा चुनावी माहौल बनने जा रहा है। Election Commission of India (ECI) ने असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान कर दिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इन राज्यों में मतदान 9 अप्रैल से शुरू होगा, जबकि 4 मई को मतगणना के बाद नतीजे सामने आएंगे।
चुनाव आयोग के अनुसार इन चुनावों में लगभग 17.4 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। पूरे चुनावी प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए करीब 25 लाख चुनाव अधिकारी और सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाएंगे।
🗳️ किस राज्य में कब होगी वोटिंग
- Assam – 9 अप्रैल
- Kerala – 9 अप्रैल
- Puducherry – 9 अप्रैल
- Tamil Nadu – 23 अप्रैल
- West Bengal – 23 अप्रैल (पहला चरण), 29 अप्रैल (दूसरा चरण)
सभी राज्यों में मतगणना 4 मई को होगी।
📊 2 लाख से ज्यादा बूथ, हर बूथ पर निगरानी
चुनाव आयोग ने बताया कि पांचों राज्यों और पुडुचेरी में 2.18 लाख से अधिक मतदान केंद्र बनाए जाएंगे। हर पोलिंग स्टेशन पर 100 प्रतिशत वेबकास्टिंग की जाएगी ताकि मतदान प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष रहे।
कई मतदान केंद्र महिलाओं द्वारा संचालित होंगे, जबकि कुछ पोलिंग स्टेशन दिव्यांग कर्मियों द्वारा भी संचालित किए जाएंगे।
🌍 20 देशों के प्रतिनिधि देखेंगे भारत का चुनाव
मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar ने बताया कि इन चुनावों को देखने के लिए 20 से अधिक देशों के चुनाव आयोगों के प्रतिनिधियों को भी आमंत्रित किया गया है, ताकि वे भारत में चुनावों के पारदर्शी और उत्सवपूर्ण संचालन को करीब से देख सकें।
👵 100 साल से ज्यादा उम्र के मतदाता भी डालेंगे वोट
चुनाव आयोग ने बताया कि इन राज्यों में 100 वर्ष से अधिक उम्र के मतदाता भी बड़ी संख्या में मौजूद हैं। 85 वर्ष से अधिक उम्र के मतदाताओं की संख्या भी काफी है। आयोग ने कहा कि हर मतदाता के लिए मतदान केंद्रों की संख्या इस तरह तय की गई है कि प्रति बूथ औसतन 750 से 850 मतदाता ही हों।
🇮🇳 “चुनाव लोकतंत्र का उत्सव”
मुख्य चुनाव आयुक्त ने इन चुनावों को “लोकतंत्र का उत्सव” बताते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं और मतदान केंद्रों के साथ यह दुनिया की सबसे बड़ी चुनावी प्रक्रियाओं में से एक होगी।
📌 राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इन पांच राज्यों के नतीजे राष्ट्रीय राजनीति की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

