महंत योगेश पुरी ने कहा कि हिंदू समाज कभी बंटा नहीं है, वह एक था, एक है और एक ही रहेगा। उन्होंने कहा कि इस देश की भूमि चंदन समान है, हर गांव तपोभूमि है और हर बालिका देवी का स्वरूप है। हमारी संस्कृति, परंपराएं और संस्कार हमारे पुराणों से जुड़े हुए हैं, इसी कारण आज भी हम चंद्रमा को चंदा मामा कहते हैं।उन्होंने कहा कि माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु जैसे देवताओं ने हिंदू कुटुंब की रचना की है। आज आवश्यकता है कि हम अपने बच्चों को ऐसे संस्कार दें कि वे सनातन धर्म की रक्षा के लिए सदैव तैयार रहें। पहले हमारे पूर्वज परिवार के एक बच्चे को धर्म की रक्षा के लिए समर्पित कर देते थे, आज यदि ऐसा संभव नहीं है तो कम से कम उन्हें धर्म की शिक्षा अवश्य दी जानी चाहिए।इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के भवेंद्र जी ने कहा कि सम्मेलन में मातृशक्ति की भारी उपस्थिति देखकर अत्यंत प्रसन्नता हुई। उन्होंने कहा कि महिलाएं समाज की सबसे बड़ी शक्ति हैं, जो देश को मजबूती के साथ आगे बढ़ाने की प्रेरणा देती हैं। माताएं ही हमें धर्म और संस्कारों का पाठ पढ़ाती हैं, जिसे हम आगे बढ़ा रहे हैं।कार्यक्रम में बबीता पाठक ने महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए सनातन धर्म के महत्व पर प्रकाश डाला।
भव्य कलश यात्रा बनी आकर्षण का केंद्रसम्मेलन से पूर्व सिर की मंडी स्थित गोरख बागीची से सैकड़ों महिलाओं द्वारा पीले वस्त्र धारण कर भव्य कलश यात्रा निकाली गई। बैंड-बाजों के साथ निकली यह यात्रा बलदेवगंज बाजार, लोहामंडी चौराहा और आलमगंज रोड होते हुए मालवीय कुंज पार्क पहुँची। महिलाएं सिर पर कलश रखकर राम धुन पर भजन गाती चल रही थीं। पूरे मार्ग में जगह-जगह पुष्पवर्षा कर कलश यात्रा का स्वागत किया गया।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं तथा गो-पूजन भी संपन्न हुआ।मंच पर रविन्द्र जैन, अमित बंसल और कृष्ण मुरारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन शिवम कुमार ने किया। वहीं व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी सुनील जैन, अनुज बंसल, राजेश कुमार, पार्षद शरद चौहान और जीतू जी ने संभाली।

