लखनऊ। यंग इंडियन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई को लेकर माननीय अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल है। न्याय योद्धा एवं उत्तर प्रदेश के सामाजिक समन्वयक अयाज़ खान अच्छू ने इस फैसले को “सत्य, संविधान और लोकतंत्र की ऐतिहासिक जीत” बताया है।
अयाज़ खान अच्छू ने जारी अपने बयान में कहा कि अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि यंग इंडियन मामले में ईडी की कार्रवाई न केवल अवैध थी, बल्कि दुर्भावना से प्रेरित भी थी। उन्होंने कहा कि यह फैसला उन तमाम साजिशों पर करारा तमाचा है, जिनके जरिए कांग्रेस नेतृत्व को बदनाम करने की कोशिश की जा रही थी।
उन्होंने कहा, “श्रीमती सोनिया गांधी और श्री राहुल गांधी के खिलाफ लगाए गए झूठे और राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित मामलों का सच आज देश के सामने आ गया है।”
उन्होंने आगे कहा कि अदालत ने साफ शब्दों में यह स्पष्ट किया है कि बिना किसी एफआईआर के ईडी का कोई क्षेत्राधिकार नहीं बनता। मनी लॉन्ड्रिंग, अपराध से अर्जित आय और संपत्ति हस्तांतरण से जुड़े आरोप निराधार पाए गए।
अयाज़ खान अच्छू ने कहा, “यह फैसला साबित करता है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है और सत्ता के दबाव में की गई कार्रवाइयों का अंत अंततः न्याय के हाथों होता है।”
उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सहित देशभर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस फैसले का स्वागत किया है। लखनऊ, कानपुर और प्रयागराज में कार्यकर्ताओं ने ‘सत्य के लिए लड़ो’ के नारे के साथ जश्न मनाया। सोशल मीडिया पर भी यह फैसला चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां ईडी की कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया जा रहा है।
अयाज़ खान अच्छू ने कहा कि पिछले एक दशक से कांग्रेस को डराने और दबाने की कोशिशें की जाती रही हैं, लेकिन यह फैसला साबित करता है कि सत्य को अधिक समय तक दबाया नहीं जा सकता।
उन्होंने कहा, “यह केवल कांग्रेस की नहीं, बल्कि हर उस भारतीय की जीत है जो लोकतंत्र और संविधान में विश्वास रखता है।”
कांग्रेस के भविष्य के संकल्प को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी सत्य, न्याय और आम नागरिक के अधिकारों की रक्षा के लिए पहले से अधिक मजबूती के साथ संघर्ष करती रहेगी।
उन्होंने कहा, “हमें कोई डरा नहीं सकता। यह फैसला नए दौर की शुरुआत है और लोकतंत्र की जड़ों को और मजबूत करेगा।”
फैसले के बाद कई स्थानों पर ‘सोनिया गांधी जिंदाबाद’ और ‘राहुल गांधी जिंदाबाद’ के नारे गूंजे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसे लोकतंत्र की जीत और न्यायपालिका की स्वतंत्रता का प्रमाण बताया।

