फर्रुखाबाद। उत्तर प्रदेश में मार्च की शुरुआत के साथ ही जहां एक ओर गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं, वहीं मंगलवार सुबह प्रदेश के कुछ जिलों में मौसम ने अचानक ऐसा यू-टर्न लिया कि लोग हैरान रह गए। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई शहरों में सुबह घनी धुंध और कोहरे की चादर छा गई। आमतौर पर जनवरी-फरवरी में देखने को मिलने वाला यह नजारा मार्च में दिखा तो लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई कि आखिर गर्मी के मौसम में यह कोहरा कहां से आ गया।
सबसे ज्यादा हैरान करने वाला दृश्य मेरठ में देखने को मिला, जहां सुबह अचानक घना कोहरा छा गया। आसमान धुंध से ढक गया और विजिबिलिटी काफी कम हो गई। हाईवे पर चलने वाले वाहन चालकों को लाइट और डीपर जलाकर गाड़ी चलानी पड़ी। हालांकि भीषण गर्मी के बीच तापमान में आई हल्की गिरावट से लोगों को कुछ राहत भी मिली।
इसी तरह फर्रुखाबाद में भी सुबह का नजारा बिल्कुल सर्दियों जैसा दिखाई दिया। शहर में घनी धुंध के कारण आसमान धुंधला नजर आया और चारों ओर कोहरा छाया रहा। इस बीच बढ़ते प्रदूषण ने भी चिंता बढ़ा दी है। शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) करीब 225 तक पहुंच गया, जिससे हवा की गुणवत्ता खराब हो गई। धुंध और प्रदूषण के कारण सड़कों पर विजिबिलिटी कम रही और वाहन चालकों को धीमी गति से वाहन चलाने पड़े।
मार्च में कोहरा क्यों?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मार्च में कोहरे जैसे हालात बनने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। दिन और रात के तापमान में अंतर इसकी एक बड़ी वजह है। दिन में तेज धूप और गर्मी रहती है, जबकि रात में तापमान अपेक्षाकृत कम हो जाता है। इस कारण हवा में नमी बढ़ जाती है और सुबह के समय धुंध या कोहरा बन सकता है।
इसके अलावा हवा में बढ़ता प्रदूषण भी धुंध बनने का कारण बनता है। जब धूल और स्मॉग के कण नमी के साथ मिल जाते हैं तो वातावरण में धुंध जैसी स्थिति बन जाती है।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का असर भी इसके पीछे हो सकता है। पश्चिमी विक्षोभ के कारण हवा में नमी बढ़ जाती है, जिससे सुबह के समय कोहरा या धुंध बनने की संभावना बढ़ जाती है। साथ ही जब हवा की गति बहुत कम होती है तो प्रदूषण और नमी जमीन के पास ही जमा हो जाती है, जिससे स्मॉग या कोहरा बन जाता है।

