आगरा, ताजगंज। कोलिहाई स्थित सूफ़ी मोहम्मद अली अंसारी मियाँ लियाकती के निवास पर आज हज़रत लियाकत हुसैन शाह उर्फ़ मुन्ने मियाँ रहमतुल्लाह अलेह की फ़ातिहा बड़े ही अदब और एहतराम के साथ अदा की गई।
नमाज़-ए-असर के बाद ज़िक्र-ए-इलाही और दुआ-ए-ख़ैर का आयोजन हुआ। मौक़े पर सूफ़ी मोहम्मद अली अंसारी मियाँ लियाकती ने कहा कि “वली-ए-अल्लाह के दरबार में हाज़िरी लगाने से दिल की मुरादें पूरी होती हैं। जो भी शख़्स वली-ए-अल्लाह की चौखट पर अपनी परेशानियाँ लेकर आता है, अल्लाह तआला अपने दोस्त के सदके में उसकी मुश्किलें आसान कर देता है। अल्लाह ने औलिया को अपना दोस्त बनाया है, और इन्हीं के ज़रिए मोहब्बत व इंसानियत का पैग़ाम पूरी दुनिया में पहुंचा है।”
उन्होंने आगे कहा कि “अगर हमें अल्लाह तक पहुँचने की तमन्ना है, तो वह रास्ता औलिया-ए-अल्लाह के दर से होकर जाता है। कुरआन पाक में भी अल्लाह तआला ने फ़रमाया है कि जो मेरा बंदा मेरे वली से मोहब्बत करेगा, मैं क़यामत के दिन उसका हिसाब उसी वली के साथ करूंगा। इसलिए हमें चाहिए कि हम दुनिया में रहते हुए औलिया-ए-अल्लाह का दामन मज़बूती से थाम लें।”
नमाज़ के बाद फ़ातिहा पढ़ी गई और लंगर-ए-आम तक़सीम किया गया।
फ़ातिहा में दरगाह गुलाम साबिर के सज्जादा नशीन सूफ़ी शमीउद्दीन सोनू रेहान, मौलाना दिलकश जालौनवी, हाशिम साबरी, क़ासिम साबरी समेत सैकड़ों मुरीद और अकीदतमंद मौजूद रहे।

