पटना।बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए सोमवार को नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने के साथ ही सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और विपक्षी महागठबंधन दोनों ने अपनी चुनावी तैयारियाँ तेज़ कर दी हैं। हालांकि, महागठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर मतभेद उभर आए हैं और कई सीटों पर इसके सहयोगी दल एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव मैदान में हैं।
जानकारी के अनुसार, राष्ट्रीय जनता दल (राजद), कांग्रेस, विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) कुल 12 विधानसभा सीटों पर सीधे मुकाबले में उतर रहे हैं। इनमें वैशाली, सुल्तानगंज और बछवाड़ा जैसी अहम सीटें शामिल हैं।
इन सीटों पर मुकाबला इस प्रकार है —
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बछवाड़ा: अबदेश कुमार राय (सीपीआई) बनाम शिव प्रकाश गरीब दास (कांग्रेस)
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नरकटियागंज: दीपक यादव (राजद) बनाम शाश्वत केदार पांडे (कांग्रेस)
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बाबूबरही: बिंदु गुलाब यादव (वीआईपी) बनाम अरुण कुमार सिंह कुशवाहा (राजद)
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वैशाली: संजीव सिंह (कांग्रेस) बनाम अजय कुमार कुशवाहा (राजद)
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राजा पाकर: प्रतिमा कुमारी दास (कांग्रेस) बनाम मोहित पासवान (सीपीआई)
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कहलगांव: रजनीश भारती (राजद) बनाम प्रवीण सिंह कुशवाहा (कांग्रेस)
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बिहारशरीफ: ओमैर खान (कांग्रेस) बनाम शिव कुमार यादव (सीपीआई)
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सिकंदरा: विनोद कुमार चौधरी (कांग्रेस) बनाम उदय नारायण चौधरी (राजद)
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चैनपुर: बाल गोविंद बिंद (वीआईपी) बनाम बृज किशोर बिंद (राजद)
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सुल्तानगंज: ललन कुमार (कांग्रेस) बनाम चंदन कुमार सिन्हा (राजद)
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करगहर: संतोष कुमार मिश्रा (कांग्रेस) बनाम महेंद्र प्रसाद गुप्ता (सीपीआई)
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वारसलीगंज: अनिता देवी महतो (राजद) बनाम सतीश कुमार (कांग्रेस)
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस ने इस चुनाव में कम से कम 70 सीटों की मांग की थी, जबकि राजद ने उसे 52 से 55 सीटों की पेशकश की। इस असहमति के चलते दोनों दलों में मतभेद गहराने लगे हैं।
वहीं, वाम दलों ने अपने 2020 के प्रदर्शन का हवाला देते हुए 40 सीटों की मांग की थी, जब भाकपा (माले) लिबरेशन, भाकपा और भाकपा (मार्क्सवादी) ने क्रमशः 12, 2 और 2 सीटें जीती थीं।
वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने भी 40 सीटों की मांग की थी, लेकिन अंततः 15 सीटों पर समझौता हुआ। सूत्रों के मुताबिक, महागठबंधन ने वीआईपी को आश्वासन दिया है कि यदि 2025 का चुनाव जीता गया तो पार्टी को उपमुख्यमंत्री पद दिया जाएगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महागठबंधन के सहयोगी दलों का आपसी संघर्ष और 12 सीटों पर सीधे मुकाबले से विपक्षी वोटों में बिखराव हो सकता है, जिसका फायदा सत्तारूढ़ एनडीए को मिलने की संभावना है।
उम्मीद की जा रही है कि यह असमंजस 23 अक्टूबर तक दूर हो जाएगा, जो दूसरे चरण के लिए नाम वापस लेने की अंतिम तिथि है।
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