आगरा। सिकंदरा क्षेत्र स्थित मस्जिद नहर वाली के ख़ातीब मुहम्मद इक़बाल ने शुक्रवार के ख़ुत्बे (व्याख्यान )के दौरान राष्ट्रीय एकता और आपसी भाईचारे का सशक्त संदेश दिया। उन्होंने नमाज़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में रहने वाले सभी लोग एक ही “क़ौम” का हिस्सा हैं, क्योंकि सबका वतन एक है।
मुहम्मद इक़बाल ने क़ुरआन-ए-मजीद की सूरह अल-आ‘राफ़ का हवाला देते हुए बताया कि हज़रत नूह अलैहिस्सलाम सहित कई अंबिया-ए-किराम ने अपनी-अपनी क़ौम को संबोधित करते हुए “या क़ौम” (ऐ मेरी क़ौम) के शब्दों का इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा कि सूरह अल-आ‘राफ़ की आयत संख्या 61, 67, 79 और 85 में अलग-अलग पैग़म्बरों द्वारा अपनी क़ौम को इसी अंदाज़ में संबोधित किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि क़ौम का तसव्वुर केवल मज़हब तक सीमित नहीं है।
इक़बाल ने कहा कि आज के दौर में जब कोई मुसलमान, हिंदू, ईसाई, सिख, बौद्ध या जैन पासपोर्ट बनवाता है, तो ‘नेशनलिटी’ के कॉलम में सभी “इंडियन” ही लिखते हैं। इसी आधार पर सभी धर्मों के मानने वाले एक ही भारतीय क़ौम का हिस्सा हैं। उन्होंने पूरे विश्वास के साथ कहा कि जब वतन एक है, तो हिंदू और मुसलमान भी एक ही क़ौम हैं।
मुहम्मद इक़बाल ने एक मुस्लिम स्कॉलर का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने वर्षों पहले अपनी डायरी में लिखा था—
“अगर किसी मैदान में किसी मुस्लिम देश और भारत का आमना-सामना हो, तो मैं दिल से चाहूंगा कि मुस्लिम देश के मुक़ाबले भारत को जीत मिले।”
उन्होंने कहा कि आज भी यही जज़्बा हर सच्चे भारतीय मुसलमान के दिल में मौजूद है।
इक़बाल ने कहा कि हिंदू-मुस्लिम एकता की अनगिनत मिसालें हमारे समाज में मौजूद हैं। बहुत से लोगों को अपने बचपन की यादें हिंदू-मुस्लिम दोस्ती से जुड़ी हुई याद आती होंगी। उन्होंने कहा कि गंगा-जमुनी तहज़ीब हमारे देश की पहचान और शान है, जो दो महान नदियों गंगा और जमुना के नाम से जानी जाती है।
वर्तमान हालात पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि आज जो माहौल चिंताजनक दिखाई देता है, वह केवल कुछ गिने-चुने लोगों की संकीर्ण “फिक्र” का नतीजा है। ऐसे हालात का मुकाबला समाज के हर वर्ग को मिलकर करना होगा, ताकि गंगा-जमुनी तहज़ीब आज के माहौल पर फिर से हावी हो सके।
ख़ुत्बे के अंत में खतीब मुहम्मद इक़बाल ने अपील की कि लोगों को आपसी गलतफहमियों को खुद दूर करना होगा, एक-दूसरे से मेल-जोल बढ़ाना होगा और एक-दूसरे के दुख-दर्द व खुशियों में शरीक होना होगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय की सबसे बड़ी ज़रूरत भाईचारा, मोहब्बत और राष्ट्रीय एकता है।

