संवाद। एस मुनीर
अलीगढ। बाबरी मस्जिद विध्वंस की बरसी के मौके पर सुप्रीम कोर्ट का बाबरी मस्जिद से जुड़ा फैसला पढ़ने से रोके जाने पर अमुवि प्रशाशन और स्टूडेंट्स आमने-सामने आ गए। छात्रों ने कहा कि हम कुछ भी गैर-कानूनी नहीं कर रहे थे, हम सुप्रीम कोर्ट का फैसला पढ़ना चाहते थे। यह एक ऐतिहासिक फैसला है जिसे सभी पक्षों ने मान लिया है और विवाद खत्म हो गया है। फैसला पढ़ने से रोकने के पीछे अमुवि प्रशाशन का क्या मकसद है, यह समझ से परे है।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी छात्रों का आर्ट्स फैकल्टी के बाहर बाबरी मस्जिद का फैसला पढ़ते हुए पोस्टर वायरल होने के बाद सुबह से ही पुलिस और प्रॉक्टर टीम के अधिकारी मौके पर मौजूद थे और किसी भी तरह की एक्टिविटी नहीं होने दी। वहीं, स्टूडेंट्स का आरोप है कि डेमोक्रेसी में हमें इस प्रोसेस से रोकना ठीक नहीं है। जो फैसला आया है, वह देश का इतिहास है और हमें इसे पढ़ने से रोकना समझ से परे है। सूत्रों के मुताबिक, डिप्टी प्रॉक्टर हसन इमाम अपनी टीम के साथ मौके पर मौजूद थे और उन्होंने सफाई दी कि एक पोस्टर वायरल हुआ था, लेकिन यह किसने और कैसे किया, यह पता नहीं है। हम मामले की जांच करने के लिए इकट्ठा हुए थे। पोस्टर में लिखा था कि बाबरी मस्जिद का फैसला पढ़ा जाएगा। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी सेंसिटिव है, जब भी कोई दिक्कत आती है, हम अलर्ट रहते हैं। हो सकता है कि यह पोस्टर किसी बाहरी व्यक्ति ने जारी किया हो, हालांकि, हम मौके पर मौजूद हैं। पुलिस प्रशासन भी हमारे साथ है, असिस्टेंट प्रॉक्टर, डिप्टी प्रॉक्टर, सभी मौजूद हैं लेकिन ऐसी कोई दिक्कत नहीं है। जानकार डिप्टी प्रॉक्टर हसन इमाम के इस बयान को एक जान बूझ क्र अनजान बनने वाला बयान बता रहे हैं। वहीं, अमुवि छात्र माअज का कहना है कि बाबरी मस्जिद को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला पढ़ने के लिए काफी छात्र थे, लेकिन यूनिवर्सिटी और पुलिस प्रशासन ने हमें ऐसा नहीं करने दिया। छात्रों ने कहा कि जब यूनिवर्सिटी में मुद्दों पर चर्चा करने की इजाजत नहीं है, तो उन्हें कहां करने दिया जाएगा। स्टूडेंट्स ने कहा कि आज बाबरी मस्जिद गिराए जाने की 33वीं बरसी है। 6 दिसंबर 1992 इतिहास का एक काला धब्बा है जिसे इतिहास कभी नहीं भूल सकता। उस दिन कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करते हुए पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में दिनदहाड़े कट्टरपंथियों ने ऐतिहासिक मस्जिद को शहीद कर दिया था और उस समय की कांग्रेस सरकार कानून का उल्लंघन होते देख तमाशा देखती रही, जिसके कारण 6 दिसंबर को काला दिवस के रूप में मनाया जाता है।
इस बीच, बाबरी मस्जिद की 33वीं बरसी पर पुलिस अलर्ट पर है। 6 दिसंबर की को समझते हुए एडमिनिस्ट्रेशन ने शहर के सेंसिटिव इलाकों में सुरक्षा के इंतजाम किए थे।

