नई दिल्ली,जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई) को भारत सरकार के पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (DoNER) द्वारा आयोजित ‘अष्टलक्ष्मी युवा विनिमय कार्यक्रम’ में हिस्सा लेने का एक महत्वपूर्ण और मूल्यवान अवसर मिला है। यह पहली बार है कि विश्वविद्यालय के छात्रों को इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पहल में भाग लेने के लिए चुना गया है, जिसका उद्देश्य सांस्कृतिक समझ और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना है। इस कार्यक्रम के तहत, जामिया मिल्लिया इस्लामिया के 20 छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल को 15 से 28 मार्च, 2026 तक भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में पूरी तरह से वित्तपोषित (fully funded) शैक्षणिक और सांस्कृतिक विनिमय दौरे में भाग लेने के लिए चुना गया है।
इस कार्यक्रम में हवाई यात्रा, रहने की व्यवस्था और अन्य लॉजिस्टिक सहायता शामिल है; वर्तमान में यह प्रतिनिधिमंडल विभिन्न शैक्षणिक चर्चाओं, संस्थागत दौरों और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) गुवाहाटी में ठहरा हुआ है।

‘अष्टलक्ष्मी युवा विनिमय कार्यक्रम’ को देश के विभिन्न क्षेत्रों के युवाओं के बीच गहरे जुड़ाव को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस पहल का उद्देश्य राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की समृद्ध विरासत, विविधता और विकासात्मक पहलों के बारे में जागरूकता को बढ़ावा देना है। शैक्षणिक चर्चाओं, क्षेत्रीय दौरों और सांस्कृतिक संवादों के माध्यम से, भाग लेने वाले छात्रों को इस क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक परिदृश्य के बारे में मूल्यवान अंतर्दृष्टि प्राप्त होगी।
इस कार्यक्रम में जामिया मिल्लिया इस्लामिया की भागीदारी माननीय कुलपति, जेएमआई, प्रो. मज़हर आसिफ़; माननीय कुलसचिव, जेएमआई, प्रो. मो. महताब आलम रिज़वी; और नेल्सन मंडेला शांति एवं संघर्ष समाधान केंद्र के निदेशक, प्रो. अबुज़र खैरी के मार्गदर्शन और गहन परामर्श के तहत संभव हो पाई है। राष्ट्रीय स्तर की पहलों में छात्रों की भागीदारी को बढ़ावा देने के उनके निरंतर समर्थन और दृष्टिकोण ने छात्रों के लिए इस अवसर को सुगम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इस प्रतिनिधिमंडल का समन्वय नेल्सन मंडेला शांति और संघर्ष समाधान केंद्र के सहायक प्रोफेसर श्री सुधांशु त्रिवेदी कर रहे हैं, जिन्हें भारत सरकार के DoNER मंत्रालय और माननीय कुलपति द्वारा इस कार्यक्रम के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। समन्वय और मार्गदर्शन के क्षेत्र में उनके प्रयासों ने, इस प्रतिष्ठित युवा विनिमय पहल में जामिया मिल्लिया इस्लामिया की भागीदारी सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई है।
जामिया मिल्लिया इस्लामिया का मानना है कि ऐसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों में भागीदारी से विद्यार्थियों के बौद्धिक और सांस्कृतिक क्षितिज का विस्तार होगा, देश के विभिन्न क्षेत्रों के बीच आपसी संबंध मज़बूत होंगे, और युवा मस्तिष्क राष्ट्रीय एकता तथा समावेशी विकास की परिकल्पना में सक्रिय रूप से योगदान देने के लिए प्रेरित होंगे।
इस पहल के माध्यम से, विश्वविद्यालय अंतर-क्षेत्रीय संवाद, अकादमिक आदान-प्रदान और युवा जुड़ाव को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता को निरंतर जारी रखे हुए है; जिसके फलस्वरूप भविष्य के लिए सामाजिक रूप से ज़िम्मेदार और सांस्कृतिक रूप से जागरूक नागरिकों का निर्माण हो रहा है।

