आगरा: आगरा के बालूगंज स्थित बेसिक प्राथमिक विद्यालय ने हाल ही में इंडियन ड्रीम्स फ़ाउंडेशन (IDF) की पहल से शिक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण रूपांतरण अनुभव किया। यह पहल सार्वजनिक–सामाजिक सहभागिता (Public–Social Partnership) के माध्यम से संपन्न हुई, जिससे विद्यालय अब एक सुरक्षित, सम्मानजनक और बाल-केंद्रित शिक्षण वातावरण में परिवर्तित हो गया है।

पहले सीमित संसाधनों और जर्जर संरचना से जूझ रहे इस विद्यालय में अब सुव्यवस्थित लाल पत्थर की फर्श, स्वच्छ पेयजल, सुचारु शौचालय, आकर्षक फर्नीचर और रंग-रोगन से सज्जित प्रेरणादायक कक्ष तैयार किए गए हैं। नव-निर्मित एक्टिविटी एवं लर्निंग रूम बच्चों की रचनात्मकता, अभिव्यक्ति और सहयोगी सीखने की भावना को प्रोत्साहित करता है।
IDF के संस्थापक पुनीत अस्थाना और समाजसेवी ज्योति सिंह ने इस पहल का नेतृत्व किया। उन्होंने अभिभावकों, शिक्षकों और समुदाय के साथ सतत संवाद और सहभागिता सुनिश्चित कर विद्यालय में समावेश, संवेदनशीलता और साझा उत्तरदायित्व की संस्कृति को मजबूत किया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को शैक्षणिक सामग्री वितरित की गई और “सरकारी विद्यालयों के सुदृढ़ीकरण में समुदाय की भूमिका” पर संवाद सत्र आयोजित हुआ। पुनीत अस्थाना ने कहा,
“जब समुदाय, संस्था और प्रशासन एक दिशा में साथ चलें, तो बदलाव केवल संरचना में नहीं, बल्कि सामाजिक सोच में भी दिखाई देता है।”
अभिभावकों ने साझा किया कि विद्यालय के नए रूप ने विशेषकर बालिकाओं की उपस्थिति, आत्मविश्वास और निरंतरता में उल्लेखनीय सुधार लाया है। अब यह विद्यालय न केवल अध्ययन का केंद्र है, बल्कि सामुदायिक भागीदारी और साझा जिम्मेदारी का प्रतीक भी बन चुका है।
IDF अब तक 5 सरकारी विद्यालयों का रूपांतरण कर चुका है, 13 शौचालयों का निर्माण/उन्नयन किया है और प्रतिवर्ष 1,500 से अधिक विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएँ प्रदान कर रहा है। पुस्तकालय, डिजिटल शिक्षण कक्ष और गतिविधि-आधारित शिक्षण मॉडल भी विद्यालयों में स्थापित किए गए हैं।
ज्योति सिंह ने कहा,
“यह पहल किसी परियोजना का अंत नहीं, बल्कि शिक्षा में समानता और गरिमा की दिशा में सतत यात्रा की शुरुआत है।”
समारोह में खंड शिक्षा अधिकारी सुमित कुमार और शिक्षा विभाग के पंकज उपाध्याय की उपस्थिति रही। लगभग 200 अभिभावक, विद्यार्थी, समुदाय सदस्य और स्थानीय प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। IDF टीम — आफताब, अंजलि, रोशनी, ललिता — और शिक्षिका दाहिम मैडम ने कार्यक्रम की योजना और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
यह पहल समावेशी विकास का जीवंत, प्रेरक और व्यवहारिक उदाहरण प्रस्तुत करती है, जिसमें विकास का केंद्र सबसे अंतिम बच्चा होता है।

