मेला श्रीरामनगरिया का भव्य आगाज़, 30 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में आस्था की डुबकी
Times of TAJ | फर्रुखाबाद
जनपद के ऐतिहासिक पांचाल घाट पर शनिवार शाम मेला श्रीरामनगरिया का शुभारंभ भव्य दीपोत्सव के साथ हुआ। गंगा तट पर एक साथ 21 हजार दीप प्रज्ज्वलित किए गए, जिससे पूरा क्षेत्र दिव्य रोशनी और आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर हो गया। दीपदान कर जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी और पुलिस अधीक्षक आरती सिंह ने मेले के सकुशल आयोजन की कामना की।
उद्घाटन से पूर्व आचार्य प्रदीप नारायण शुक्ल द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन-पूजन कराया गया। इसके बाद गंगा तट पर दीपोत्सव का आयोजन हुआ, जहां दीपों से ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’, ‘मेला रामनगरिया पांचाल घाट’ और ‘गंगे तव दर्शनात मुक्ति’ जैसे संदेश उकेरे गए। एक साथ हजारों दीप जलने से गंगा तट पर अनुपम छटा बिखर गई।
पौष पूर्णिमा के पहले स्नान पर उमड़ा जनसैलाब
मेला शुरू होने से पहले पौष पूर्णिमा के प्रथम स्नान पर्व पर 30 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। कल्पवासी महिलाओं और पुरुषों ने विधिविधान से दीपदान किया, जबकि भव्य गंगा आरती के दौरान पूरा घाट “मां गंगे” के जयघोष से गूंज उठा।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
पुलिस अधीक्षक आरती सिंह ने बताया कि मेले की सुरक्षा के लिए एक कोतवाली और 11 पुलिस चौकियां स्थापित की गई हैं। इसके साथ ही 7 वॉच टावर, आधुनिक उपकरणों से लैस पुलिस बल, फायर ब्रिगेड, सीसीटीवी कैमरे और खोया-पाया केंद्र की विशेष व्यवस्था की गई है।
मेला सचिव एवं अपर जिलाधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि मेले का विधिवत शुभारंभ हो चुका है और सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर ली गई हैं।
विकास प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र
मेले में आयोजित विकास प्रदर्शनी में स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, महिला एवं बाल विकास, स्वरोजगार और सामाजिक कल्याण विभागों द्वारा सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। विभिन्न विभागों के स्टॉल श्रद्धालुओं और आमजन को जागरूक कर रहे हैं।
रोशनी, संस्कृति और आस्था का संगम
इस वर्ष मेला परिसर को विशेष रूप से आकर्षक ढंग से सजाया गया है। रंग-बिरंगी लाइटों से जगमगाता गंगा तट, भव्य प्रवेश द्वार, सुसज्जित मंच और सुव्यवस्थित कल्पवास क्षेत्र श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मेले में धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकनृत्य, लोकगीत, रामकथा और भजन-कीर्तन भी आयोजित किए जाएंगे।
सैकड़ों वर्षों पुरानी परंपरा
मेला श्रीरामनगरिया का इतिहास सैकड़ों वर्षों पुराना है। गंगा तट पर लगने वाला यह मेला समय के साथ जनपद का सबसे बड़ा धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन बन गया है, जो आस्था, परंपरा और विकास का अनूठा संगम प्रस्तुत करता है।
रिपोर्ट: तौफीक फारूकी | Times of TAJ

