नई दिल्ली। भारत के नए मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत के शपथ ग्रहण समारोह में नेता विपक्ष राहुल गांधी की अनुपस्थिति को लेकर सियासी तूफ़ान थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाज़ी जारी है।
भाजपा ने राहुल गांधी की गैरमौजूदगी पर कड़ा रुख अपनाते हुए आरोप लगाया है कि उन्होंने संवैधानिक महत्व के इस समारोह में जान-बूझकर हिस्सा नहीं लिया। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह न केवल लोकतांत्रिक परंपराओं, बल्कि संविधान के प्रति भी अनादर का संकेत है। सोशल मीडिया पर भी भाजपा समर्थक वर्ग राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए सवाल उठा रहा है और उनकी कथित विदेश यात्रा या अन्य कारणों को लेकर पोस्ट शेयर की जा रही हैं।
वहीं, सूत्रों के अनुसार जानकारी यह सामने आई है कि नेता विपक्ष राहुल गांधी को शपथ ग्रहण समारोह के लिए आमंत्रित ही नहीं किया गया था। कांग्रेस की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक विस्तृत बयान नहीं आया है, हालांकि पार्टी से जुड़े कुछ नेताओं ने अनौपचारिक तौर पर यह तर्क दिया है कि हर संवैधानिक समारोह में नेता विपक्ष की मौजूदगी अनिवार्य नहीं होती।
कांग्रेस का कहना है कि इस समारोह में पार्टी की ओर से प्रतिनिधित्व कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने किया, जो स्वयं संविधान-व्यवस्था का सम्मान दर्शाता है। कांग्रेस पहले भी भाजपा के आरोपों को यह कहते हुए खारिज कर चुकी है कि भाजपा ऐसे मुद्दों को तूल देकर वास्तविक संवैधानिक सवालों से ध्यान भटकाना चाहती है।
भाजपा ने इसे कांग्रेस की “संवैधानिक जिम्मेदारियों की उपेक्षा” करार दिया है, जबकि कांग्रेस का पलटवार है कि भाजपा ही देश में संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है और यह विवाद उसी राजनीतिक संघर्ष की कड़ी है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत के शपथ ग्रहण के इस महत्वपूर्ण अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, केंद्रीय मंत्रीमंडल के सदस्य तथा शीर्ष संवैधानिक और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। विपक्ष के नेता की अनुपस्थिति को भाजपा जहाँ गंभीर राजनीतिक और संवैधानिक प्रश्न के रूप में उठा रही है, वहीं कांग्रेस की चुप्पी और आधिकारिक स्पष्टीकरण के अभाव में मुद्दे पर विवाद और चर्चा लगातार जारी है।

